तेज गति से घट रहे जलस्तर को बचाने के लिए पिछले एक साल से रेन वाटर हार्वेस्टिंग का प्रोजेक्ट बजट की भेंट चढ़ रहा है। यह प्रोजेक्ट एकीकृत जल प्रबंधन परियोजना (आईडब्ल्यूएमपी) के तहत जिले के पांच गांवों के राजकीय स्कूलों में लगाए जाना है। कृषि विभाग की ओर से यह सिस्टम पहली बार लगाया जाना है। केंद्र सरकार की ओर से बजट करीब 12.50 लाख रुपये जारी न होने से योजना फिलहाल ठंडे बस्ते में पड़ी है।
कृषि विभाग की ओर से एकीकृत जल प्रबंधन परियोजना के तहत खानपुर कलां, चिड़ाना, बजाना कलां, पुगथला व कासंडी गांवों के राजकीय स्कूलों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाने हैं। इसके लिए विभाग की ओर से सरकार को डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट ऑफ रिपोर्ट) तैयार कर अप्रैल 2015 में भेजी गई थी। सरकार ने दिसंबर 2015 में इसे मंजूरी दे दी थी। एकीकृत जल प्रबंधन परियोजना (आईडब्ल्यूएमपी) के तहत लगने वाले प्रत्येक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पर करीब 2.50 लाख रुपये खर्च होने हैं, लेकिन सरकार की ओर की ओर से बजट जारी न होने से यह परियोजना फिलहाल ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है।
सभी सरकारी स्कूलों की छतों पर लगेंगे
खानपुर कलां, चिड़ाना, बजाना कलां, पुगथला व कासंडी गांवों के राजकीय स्कूलों की छतों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाने है। स्कूलों की छतों पर आने वाला बरसात का पानी इस सिस्टम के जरिये दोबारा जमीन में छोड़ा जाएगा।
कैसे काम करेगा सिस्टम
रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने का मुख्य उद्देश्य बरसात के पानी को री-स्टोर करके जमीन में पहुंचाना है। इसके लिए सिस्टम में बड़े-बड़े चेंबर बनाए जाएंगे। करीब 150 फुट का बोर बनाया जाएगा, जिनमें पाइप डाली जाएगी। इन चेंबर को पत्थरों की तीन परत बनाकर तैयार किया जा रहा है, ताकि बरसात का जो पानी चैंबर में पहुंचेगा वह एक परत से दूसरी परत तक पानी फिल्टर होता हुआ पहुंचेगा। तीसरी परत को पार करने में पानी पाइप के माध्यम से पूरी तरह से फिल्टर होकर जमीन में पहुंचेगा, जिससे गिरते जलस्तर में सुधार हो सके।
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गांवों में पानी की कमी, जरूरत पर कर सकेंगे इस्तेमाल
कृषि अधिकारियों का कहना है कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के जरिए बरसात के पानी को रिचार्ज करके दोबारा जमीन में पहुंचाया जाएगा। इससे जलस्तर में ज्यादा कमी आए। आगे यदि जरूरत पड़ेगी तो इस पानी को ट्रीटमेंट करने के बाद इस्तेमाल में लाया जा सके। कई गांव ऐसे हैं, जहां पानी की अधिक किल्लत है, तो वहां पर रेन वाटर को दोबारा ट्रीटमेंट करके इसे पीने लायक बनाया जाता है।
गांवों के सरकारी स्कूलों की छतों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए प्रोजेक्ट सरकार को भेजा था। सरकार की ओर से इस प्रोजेक्ट पर दिसंबर, 2015 में मंजूरी दी थी। लेकिन बजट जारी न होने से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का काम भी शुरू नहीं हो पाया। -डॉ. वीरेंद्र देव आर्य, उप कृषि निदेशक, सोनीपत