सुखपुरा चौक पर उपद्रवियों ने दंगे के दौरान जलाई थी दुकान
पिछले दिनों प्रदेश में हुए दंगों में आरक्षण का मुद्दा कम और विकासशील सरकार का तख्ता पलट करने की मंशा ज्यादा थी। सरकार को गिराने के लिए प्रदेश के बाहर से आए कुछ लोगों ने यह षड्यंत्र रचा था। यह बात प्रकाश सिंह जांच कमेटी की रिपोर्ट ने साबित कर दिया। यह टिप्पणी आर्थिक एवं पिछड़ा कल्याण निगम के चेयरमैन रामचंद्र जांगड़ा ने की। वह शनिवार को बरोदा रोड स्थित भाजपा की गोहाना निगरानी कमेटी के प्रमुख गुलशन वीरमानी के आवास पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में राजनीतिक लोग और भ्रष्ट कर्मचारियों की लूटपाट पर इस सरकार ने पूरी तरह रोक लगा दी है।
इससे असामाजिक लोगों में बेचैनी थी कि इस लोकप्रिय सरकार को कैसे गिरा जाए। इसको अंजाम देने के लिए पिछले दिनों दूसरे प्रदेश से आए लोगों ने राज्य सरकार को बदलने के लिए षड्यंत्र रचा। हालांकि अबकी बार प्रदेश के लोगों, खाप व पंचायतों ने ऐसे लोगों को दूर कर दिया है। उन्हें मालूम है कि सामाजिक सौहार्द से ही प्रदेश का विकास होगा। अगर आरक्षण से किसी का विकास होता तो आजादी के 68 साल बाद भी देश की 65 प्रतिशत आबादी गरीब नहीं होती। इस 65 प्रतिशत आबादी के 35 वर्ष के कम उम्र के युवक आने वाले समय में कलात्मक बनाए जाएंगे। क्योंकि आज स्वयं रास्ता बनाने की जरूरत है। इस मौके पर भाजपा की गोहाना निगरानी कमेटी के प्रमुख गुलशन वीरमानी, मंडल अध्यक्ष बलराम कौशिक व इंद्रजीत वीरमानी के अलावा अनेक भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित थे।