फोटो 19- सोनीपत के खरखौदा स्थित सावित्री बाई फुले महिला पार्क में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान प
खरखौदा। सावित्री बाई फुले महिला पार्क में आयोजित पांच दिवसीय श्रीराम कथा का बुधवार को समापन किया गया। समारोह में कथावाचक अंजलि आर्य ने अपने प्रवचन में श्रीराम के जीवन के बारे में श्रद्धालुओं को बताया। श्रीराम ने सदैव मर्यादा में रहते हुए कर्तव्य, धर्म और सत्य का पालन किया। श्रीराम ने किसी भी परिस्थिति में अपने धर्म का त्याग नहीं किया।
अंजलि आर्य ने कहा कि जब राम वन जाने लगे तो माता सीता व लक्ष्मण ने भी उनके साथ वनवास जाने का निर्णय लिया था। उनके इस त्याग और कर्तव्यनिष्ठा से समस्त अयोध्यावासी स्तब्ध थे। राम ने वनवास के दौरान साधारण जीवन बिताया, ऋषियों के आश्रमों में रुके और धर्म की शिक्षा प्राप्त की।
भरत ने राम से अयोध्या लौटने का आग्रह किया, लेकिन राम वनवास के वचन को निभाने की दृढ़ता व्यक्त करते हैं। रावण, जो लंका का राजा था, उसने सीता का हरण कर अपने महल में बंदी बना लिया। राम ने पत्नी को मुक्त कराने के लिए वानर और भालू सेना की मदद से लंका पर चढ़ाई कर दी। राम ने काफी कठिनाइयों और संघर्षों के बाद रावण का वध किया और सीता को मुक्त कराया। इसके बाद श्रीराम अयोध्या लौटे, इस दौरान उन्हें कई बाधाएं आईं, लेकिन वह अपने धर्म का पालन करते रहे। कथा के समापन अवसर पर पहुंचे मुख्य अतिथि शक्ति ठेकेदार ने एक लाख रुपए का सहयोग दिया।