जिला परिवाद एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में डीसी ललित सिवाच व अन्य अधिकारी
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उपायुक्त ललित सिवाच ने बुधवार को तहसील परिसर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान लोगों को कर्मचारियों के कमरे से निकलते देख उपायुक्त भड़क गए और कर्मचारियों को फटकार लगाई। उन्होंने निर्देश दिए कि खिड़कियों पर आवेदन करने वालों की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर करें। बैक डोर से सगे-संबंधी या मित्रों को सेवाएं देना स्वीकार नहीं है।
उपायुक्त ललित सिवाच ने पहले विभिन्न प्रकार के प्रमाणपत्र जारी करने वाले कक्ष की जांच की। जिसमें कर्मचारियों के अलावा कुछ लोगों की भीड़ पर उन्होंने आपत्ति जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि खिड़की के बाहर से ही आवेदकों के कार्य करें। आगे बढ़ते हुए उपायुक्त ने रजिस्ट्री क्लर्क से ब्योरा मांगा। साथ ही उन्होंने रजिस्ट्रियों की जांच भी करवाई। तहसीलदार को भी निर्देश दिए कि विभिन्न प्रकार की रजिस्ट्रियों की पूरी जानकारी जरूर भेजें। उपायुक्त ने हाल ही में की गई रजिस्ट्रियों की जांच के लिए एक कमेटी का गठन भी किया है। जिसमें जिला नगर योजनाकार, जिला राजस्व अधिकारी, नगर निगम व एसडीएम कार्यालय के प्रतिनिधियों सहित नगर पालिका कुंडली के सचिव के साथ स्टांप ऑडिटर को शामिल किया गया। उन्होंने निर्देश दिए कि अप्रैल, मई व जून में 7-ए की रजिस्ट्री, जीपीए, हिबानामा, रजिस्टर्ड एग्रीमेंट, 47-ए के सभी दस्तावेजों की गंभीरता से जांच करके रिपोर्ट प्रस्तुत करें। साथ ही उन्होंने लंबित रजिस्ट्रियों का भी ब्योरा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। उपायुक्त ने निर्देश दिए कि किसी भी क्षेत्र में अवैध रूप से कॉलोनी विकसित नहीं होनी चाहिए। एक-दो एकड़ भूमि में अवैध कॉलोनी विकसित किए जाने की शिकायतें मिल रही हैं। इन शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जाए। इस दौरान एसडीएम शशि वसुंधरा, जिला राजस्व अधिकारी मनबीर, तहसीलदार मनोज अहलावत व नायब तहसीलदार बलवान सिंह आदि मौजूद रहे।