गोहाना । उपायुक्त सुशील सारवान ने गांव निजामपुर की सरपंच राधिका को भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित कर दिया। बीडीपीओ को ग्राम पंचायत की समस्त चल-अचल संपत्ति का चार्ज बहुमत वाले पंच को सौंपने के आदेश दिए हैं।
उपायुक्त ने सरपंच पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की समय पर जांच पूरी न करने और उच्च न्यायालय के आदेशोें का पालन नहीं करने पर बीडीपीओ कथूरा को नोटिस जारी किया है। समाज शिक्षा एवं पंचायत अधिकारी (एसईपीओ) के विरुद्ध विभाग के महानिदेशक को कार्रवाई की सिफारिश की है। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को ग्राम सचिव निलंबित और विभागीय कार्रवाई करने की अनुशंसा की।
गांव निजामपुर के अनिल कुमार ने पंचायत की तरफ से कराए गए कई कार्यों में अनियमितता बरतने और भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाते हुए अधिकारियों को शिकायतें दी थीं। अधिकारियों ने भी स्थानीय स्तर के अधिकारियों को पूर्ण जांच रिपोर्ट देने को कहा था।
समय पर उचित कार्रवाई व जांच न होने पर उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की शरण ली थी। इस पर उपायुक्त सुशील सारवान ने जांच को आगे बढ़ाया था। दस्तावेजों का अवलोकन करने पर प्रथम दृष्टया सरपंच और अधिकारियों पर आरोप सिद्ध हुए।
इस पर उपायुक्त ने कार्रवाई की और अतिरिक्त उपायुक्त को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। उपायुक्त ने आदेश दिए कि सरपंच राधिका को जांच पूरी होने तक निलंबित किया जाता है। बीडीपीओ को राधिका से चार्ज लेकर चल-अचल संपत्ति का रिकॉर्ड बहुमत वाले पंच को सौंपा जाए।
बीडीपीओ को जांच को समय पर पूरा न करने, न्यायालय के आदेशों की पालना न करने और अवमानना याचिका की पैरवी न करने पर कारण बताओ नोटिस दिया गया।
वहीं, समाज शिक्षा एवं पंचायत अधिकारी सुशील कुमार आदेश के बावजूद अवमानना याचिका की पैरवी में उपस्थित न होने पर विकास एवं पंचायत विभाग के महानिदेशक को विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की।
ग्राम सचिव सन्नीपाल को पद पर रहते हुए अनुरूप कर्तव्यों के पालन में दोषी पाया गया और आदेश के बावजूद अवमानना याचिका में उच्च न्यायालय की पैरवी में उपस्थित नहीं हुए। इस पर उपायुक्त ने जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को ग्राम सचिव को तुरंत प्रभाव से निलंबित करने और विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की।