आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत हरियाणा कला परिषद द्वारा आयोजित तीन दिवसीय मनोहारी रसोई प्रतियोगिता गोहाना ठसका रोड स्थित कबीर आश्रम में संपन्न हुई। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि मुख्यमंत्री के ओएसडी गजेंद्र फौगाट, कला परिषद निदेशक संजय भसीन व ऑस्ट्रेलिया से आए कलाकार विकास श्योराण ने विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए। गजेंद्र फौगाट ने कहा कि मुख्यमंत्री की सोच है कि म्हारी हरियाणवी संस्कृति की धमक विदेशों तक भी हो, ताकि वहां रहने वाले हरियाणवियों को भी गर्व की अनुभूति हो। प्रतियोगिता में सरोज ने मीठे चावल तो किशनदेई ने बाजरे की रोटी बनाकर प्रथम पुरस्कार प्राप्त किए।
रोहतक मंडल द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में हरियाणा के देसी खानपान के लिए मनोहारी रसोई स्थापित की गई। इस दौरान महिलाओं ने चूरमा, हलवा, गुलगुले, सुहाली, खांड कसार समेत अनेक प्रकार की मिठाई व भोजन तैयार किया। गजेंद्र फौगाट ने कहा कि मुख्यमंत्री ने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में रहने वाले विकास श्योराण से लोगों का परिचय कराया, जो यू ट्यूब और फेसबुक पर पत्नी रितु चौहान के साथ कॉमेडी वीडियो बनाते हैं। कला परिषद के निदेशक संजय भसीन ने कहा कि कला परिषद हरियाणवी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के मेले करवाती रहती है। गजेंद्र फौगाट व विकास श्योराण ने गानों पर ठुमके लगाए। कार्यक्रम में सभी विजेता प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चार सांत्वना पुरस्कार दिए गए। कार्यक्रम में एक साथ 21 पुराने व्यंजन बनाए गए।
इस मौके पर प्रधान रामकुमार माहरा, विजय निनानिया एमसी, रमेश देवराज, राजवीर दमानिया, बलबीर राणा मौजूद रहे। कार्यक्रम संचालक गौतम सत्यराज ने अतिथियों का स्वागत किया। मनोहरी रसोई कार्यक्रम की तैयारी कर रहे सभी ग्रामीण कलाकार दीपक आर्य, आनंद, सचिन, दीपांशु, राजा व सत्यवान ने योगदान दिया।
मिठाई व्यंजन के विजेता
पहली प्रतियोगिता मिठाई व्यंजन से संबंधित थी, जिसमें गुड़ के चावल तैयार करने वाली सरोज बाला को प्रथम पुरस्कार के रूप में 3100 रुपये, माल पूडे़ बनाने वाली सुरेश को दूसरे पुरस्कार के रूप में 2100 रुपये, फीकी खीर बनाने वाली मुन्नी को तीसरे पुरस्कार के रूप में 1100 रुपये और मीठी कढ़ी बनाने वाली मुन्नी, मीठे चावल बनाने वाली सोनिया, लापसी बनाने वाली कमला व मीठा दलिया बनाने वाली नन्ही को 500-500 रुपये के साथ सांत्वना पुरस्कार देकर पुरस्कृत किया गया।
अन्न से संबंधित व्यंजन प्रतियोगिता के विजेता
अन्न से संबंधित व्यंजन प्रतियोगिता में बाजरे की रोटी बनाने वाली किशनदेई को प्रथम पुरस्कार के रूप में 3100 रुपये, मेसी रोटी बनाने वाली गीता को द्वितीय पुरस्कार के रूप में 2100 रुपये व बाजरे की रोटी बनाने वाली सुदेश को तृतीय पुरस्कार के रूप में 1100 रुपये से पुरस्कृत किया गया। नमकीन दलिया बनाने वाली ममता, खंडली रोटी बनाने वाली बोबली व चूरमा बनाने वाली कृष्णा को सांत्वना पुरस्कार के रूप में 500-500 रुपये दिए गए।