रोडवेज के चालक व परिचालक की लोकेशन का पता लगाने व बस में होने वाली किसी घटना के आरोपी की आसानी से पहचान के लिए 30 बसों में लगाए गए कैमरों का ट्रायल कामयाब हो गए हैं। इन बसों में ट्रायल के लिए चार महीने पहले 60 कैमरे लगाए गए थे। बसों में कैमरे कामयाब होने की रोडवेज ने मुख्यालय को रिपोर्ट भेज दी है। अब जल्द ही जिले की सभी बसों में जल्द कैमरे लगेंगे, जिससे रोडवेज को काफी फायदा होगा। वहीं, बसों में होने वाली घटनाओं पर भी रोक लगेगी।
रोडवेज को होगा लाभ, रुकेंगे अप्रिय घटनाएं
सोनीपत डिपो और गोहाना सब डिपो में 230 बसों का संचालन है। ये बसें आसपास के गांवों से लेकर दूसरे राज्यों तक आवागमन करती हैं। जिले में हर रोज करीब 42 हजार यात्री इन बसों में यात्रा करते हैं, जिससे रोडवेज को प्रतिदिन करीब 19 लाख रुपये की आमदनी होती है। डिपो व सब डिपो से यात्रियों को लेकर गए चालक व परिचालक कई बार अपनी मनमानी करते हुए अधिकारियों की ओर से पूछी गई लोकेशन को गलत बताते हैं। सवारी कम मिलने का बहाना बनाया जाता है, इससे रोडवेज को काफी नुकसान होता है। इसके अलावा कई बार बस में चालक व परिचालक के साथ यात्री झगड़ा करते हैं और उनके साथ मारपीट कर भाग निकलते हैं। वहीं, चालक व परिचालक की ओर से यात्रियों के साथ किए गए दुर्व्यवहार की शिकायतें भी विभाग को मिलती रहती हैं। ऐसे में चालक व परिचालकों की मनमानी के चलते तथा बसों में होने वाली घटनाओं पर रोक लगाने के लिए विभाग ने बसों में कैमरे लगाने का फैसला लिया था। दिसंबर 2016 में डिपो व सब डिपो की 30 बसों में ट्रायल के लिए कैमरे लगाए गए थे, जिनका ट्रायल सफल रहा। रोडवेज की ओर से इन कैमरों का ट्रायल कामयाब होने की रिपोर्ट मुख्यालय भेजी गई है।
बसों में लगाए गए डोम आईपी कैमरे
रोडवेज की ओर से बसों में कैमरे लगाने का काम दिल्ली की कंपनी टेक एसआईएस को दिया गया है। कंपनी की ओर से 30 बसों में 60 कैमरे लगाए, जिनमें एक कैमरा चालक के पास तथा दूसरा बस के बीच में लगाया गया। ये कैमरे ऑनलाइन जोड़े गए। कैमरों के डीवीआर की रिकार्डिंग 60 दिनों तक देखी जा सकती है, जिसके लिए कंपनी की ओर से निर्धारित ऐप डाउनलोड किया गया है। वहीं, डिपो प्रबंधन को एक पासवर्ड दिया गया है। इससे संबंधित डिपो की बसों का डाटा मिलेगा और जिस भी बस की लोकेशन व स्टेट्स चेक करना हो उसका नंबर डालने के साथ ही वह सामने जाएगी। विभागाधिकारियों के अनुसार कैमरों का तीन महीनों तक की गई ट्रायल कामयाब हुई।
बसों की लोकेशन पता लगाने व इनमें होने वाली घटनाओं पर रोक लगाने के लिए विभाग ने बसों में कैमरे लगाने का फैसला लिया था। इसके लिए लगभग चार माह पहले 30 बसों में ट्रायल के लिए 60 कैमरे लगाए गए थे। अभी तक इन कैमरों में कोई कमी नहीं आई है। सभी कैमरे सुचारु रूप से चल रहे हैं। कैमरों का ट्रायल कामयाब होने की रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी है। उम्मीद है कि सभी बसों में लगाने के लिए कैमरे जल्द मिलेंगे।
-जोगेंद्र सिंह रावल, जीएम रोडवेज।