सरकार ने गांवों में खाली पड़ी शामलात देह व मुस्तरका मालकान भूमि का इंतकाल तोड़कर पंचायतों के नाम करने की योजना तैयार की है। जिससे किसान संगठनों में रोष बना हुआ है। भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने इसी मामले में शहर की छोटूराम धर्मशाला में बैठक बुलाई। जिसमें किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी भी शामिल हुए। उन्होंने सरकार की तरफ से उठाए जा रहे इस प्रकार के कदम की आलोचना की। बैठक में निर्णय लिया गया कि सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की जाएगी, साथ ही गांवों में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।
बैठक में पहुंचे किसानों ने कहा कि यह किसानों के जमीन है जिसे उनके पूर्वजों ने अपने विभिन्न कार्यों के लिए खाली छोड़ रखा था। अब सरकार इस जमीन का इंतकाल तोड़कर पंचायतों के नाम कर रही है। किसानों का कहना है कि वर्तमान समय में इस जमीन को गोचरान भूमि, सार्वजनिक कार्यक्रमों, फसल अवशेषों की कटाई करने, पौधरोपण जैसे विभिन्न कार्यों में इस्तेमाल किया जा रहा है। इस जमीन को अगर पंचायतों, नगरपालिकाओं व नगर निगमों के नाम कर दिया जाएगा तो किसानों की परेशानियां बढ़ जाएंगी। बैठक में भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने फैसला किया कि सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की जाएगी। इसी कड़ी में 28 सितंबर को लघु सचिवालय परिसर में किसान अर्द्घनग्न होकर प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष अशोक लठवाल, चेयरमैन भगत सिंह, खरखौदा ब्लाक अध्यक्ष जयसिंह, कथूरा ब्लाक अध्यक्ष कृष्ण मलिक, सुरजीत मलिक, सत्यवान, महिला प्रदेश उपाध्यक्ष बिंदू सहित अन्य किसान मौजूद रहे।