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गेट की इंजीनियरिंग में फाल्ट, गाज गिरना तय

Thu, 13 Oct 2016 12:57 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, सोनीपत
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हादसा (file) - फोटो : sonipat
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रोहतक रोड पर हरसाना के पास नगर निगम की ओर से बनाई गई नंदीशाला के गेट के डिजाइन में ही फाल्ट है, जिसकी रिपोर्ट बनाकर एसडीएम निशांत यादव ने डीसी व निगम आयुक्त को भेज दी है। ऐसे में निगम की इंजीनियरिंग ब्रांच पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। मामले में जेई सतीश को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है। हालांकि, निगम के नवनियुक्त आयुक्त वीरेंद्र हुड्डा अभी मामले में अनभिज्ञता जाहिर कर रहे हैं। वहीं, जिला कष्ट निवारण कमेटी की मीटिंग भी जल्द होने वाली है, जिसमें अधिकारियों को नगर निगम के कई मामलों में जवाब देना होगा।
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शहर में लावारिस घूम रहे नंदी के लिए नगर निगम की ओर से हरसाना गांव के पास पांच एकड़ में एक करोड़ से अधिक की लागत से नंदीशाला का निर्माण करवाया गया था। खुद कैबिनेट मंत्री कविता जैन ने दो माह पहले नंदीशाला का उद्घाटन किया था। इसके 20 दिन बाद 24 सितंबर को नंदीशाला का गेट गिर गया था, जिसके नीचे दबने से सुरक्षागार्ड नरेश की मौत हो गई थी। इसके अलावा, उसका साथी बाबूराम गंभीर रूप से घायल हो गया था। तत्कालीन निगम आयुक्त अश्वनी मैंगी ने कार्रवाई करते हुए जेई सतीश को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया था और ठेकेदार सुनील के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ठेकेदार को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, ठेकेदार को साथ-साथ जमानत मिल गई थी। इधर, मामले की डीसी केएम पांडुरंग ने एसडीएम निशांत यादव को मामले की जांच सौंपी थी। यादव ने जांच के दौरान नंदीशाला का निरीक्षण किया और अब जांच रिपोर्ट बनाकर डीसी एवं निगम आयुक्त को सौंप दी। जांच में एसडीएम ने साफ लिखा है कि गेट का डिजाइन ही गलत तरीके से किया गया है। लोहे का भारी भरकम गेट एक एंगल के सहारे कैसे चल सकता है। इसकी इंजीनियरिंग में ही फाल्ट है। अब सवाल उठता है कि एक तो ठेकेदार ने लापरवाही से गेट तैयार कर दिया। ऊपर से वे अधिकारी कौन थे, जिन्होंने गेट की इंजीनियरिंग को हरी झंडी दे दी।
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मंत्री के आदेश फाइलों में, नहीं हुई ठेकेदार से रिकवरी
नगर निगम के सड़क सैंपल मामले में पिछली मीटिंग में जिला कष्ट निवारण समिति की मीटिंग में मंत्री नायाब सैनी ने निगम अधिकारियों को आदेश दिए थे कि मामले में ठेकेदार के खिलाफ न केवल कार्रवाई की जाए, बल्कि उससे रिकवरी भी की जाए। उस समय निगम के एसई टीएल शर्मा ने कहा था कि ठेकेदार को पत्र भेजकर जांच में शामिल होने के लिए गया था, लेकिन जवाब नहीं आया। उनका पक्ष लेना जांच में अनिवार्य है। मीटिंग में दो दिन बाद एक माह हो जाएगा, लेकिन निगम ने न तो अभी तक ठेकेदार के खिलाफ केस दर्ज करवाया और न ही रिकवरी की है।

फेस्टिवल सीजन में बढ़ा ट्रैफिक, सिग्नल फिर भी बंद
नगर निगम की ओर से शहर के अंदर करीब 30 लाख रुपये खर्च कर गीता भवन चौक, महाराजा अग्रसेन चौक, कालुपूर चुंगी व महाराणा प्रताप चौक पर रेड लाइट लगवाई थी। लाखों रुपये की लागत से लगे ट्रैफिक सिग्नल कुछ दिन बाद ही बंद हो गए। 14 सितंबर को ग्रीवेंस कमेटी की मीटिंग में मामला मंत्री नायब सैनी के सामने पहुंचा। मंत्री ने एडीसी को जांच के आदेश दिए, लेकिन एक माह बाद मात्र पत्र लिखने की बात कहकर अधिकारी पल्ला झाड़ रहे हैं। 

ई-टेंडरिंग मामला: दो माह बाद भी चंडीगढ़ से नहीं आए आदेश
नगर परिषद के समय में हुए ई-टेंडिरिंग में हुए घपले की जांच के आदेश जहां शहर से विधायक और शहरी निकाय मंत्री कविता जैन खुद दे चुकी है। वहीं, ग्रीवेंस कमेटी की मीटिंग में नायाब सिंह सैनी ने भी जांच को जल्द से जल्द पूरा कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए थे। निगम की ओर से मामले में रिपोर्ट बनाकर चंडीगढ़ भेजी थी, लेकिन अभी तक किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकी है।

मामला ही संज्ञान में नहीं : आयुक्त
निगम कार्यालय में जांच को लेकर धरने प्रदर्शन से लेकर डीसी से कार्रवाई के लिए ज्ञापन तक सौंपे जा चुके है। साथ ही प्रदेश के दो-दो मंत्री जांच के आदेश दे चुके हैं। इसके बावजूद निगम कमिश्नर का कहना है कि कोई भी मामला उनके संज्ञान में नहीं है।

एडीसी शिव प्रसाद शर्मा से सीधी बातचीत 
सवाल- जिला कष्ट निवारण समिति मेें मंत्री ने तीन मामलों की जांच साैंप थी, क्या रहा?
जवाब- मामलों की जांच चल रही है।  
सवाल- सर, एक माह की जांच में क्या मिला?  
जवाब- रेड लाइट के मामले में निगम को पत्र लिखा जा चुका है, जल्द ही चालू करवा दी जाएगी। 
सवाल- सीसीटीवी कैमरे और बहालगढ़ रोड के मामले मेें क्या प्रगति है?
जवाब- व्यस्तता के कारण अभी मौका नहीं देखा है। उन्हें भी जल्द ही ठीक करवा दिया जाएगा।

नंदीशाला गेट हादसे की जांच में गेट के डिजाइन में ही फाल्ट मिला है। इंजीनियरिंग में लापरवाही बरती गई है। रिपोर्ट बनाकर डीसी व निगम आयुक्त को भेज दी है। अब आगे की कार्रवाई जिला व निगम प्रशासन को करनी है। 
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निशांत यादव, एसडीएम
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