सोनीपत। परंपरागत खेती से आगे बढ़कर झींगा मछली उत्पादन करने वाले किसानों को अब बड़ी राहत मिलने जा रही है। रोलद गांव में मत्स्य विभाग के सहयोग से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक कोल्ड स्टोर तैयार किया गया है। आधे एकड़ क्षेत्र में विकसित इस सुविधा का संचालन जल्द शुरू होने की उम्मीद है।
इसके शुरू होने के बाद किसान अपनी उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकेंगे और बाजार में अनुकूल भाव मिलने पर बिक्री कर पाएंगे। जिला मत्स्य अधिकारी मंजू बाला के नेतृत्व में विभागीय टीम ने कोल्ड स्टोर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
अधिकारियों के अनुसार सभी औपचारिकताएं पूरी होते ही इसका संचालन शुरू कर दिया जाएगा जिससे क्षेत्र के झींगा उत्पादकों को सीधा लाभ मिलेगा। झींगा मछली की खेती सामान्य तौर पर साल में दो चक्रों में की जाती है। पहला उत्पादन मार्च-अप्रैल में बीज डालने के बाद जून-जुलाई में तैयार होता है, जबकि दूसरा चक्र जुलाई-अगस्त से शुरू होकर अक्तूबर-नवंबर तक चलता है।
सर्दियों में इसका उत्पादन नहीं किया जाता। सीजन के दौरान बाजार में आवक बढ़ने से कीमतों पर असर पड़ता है जबकि ऑफ सीजन में झींगा के दाम काफी बढ़ जाते हैं। ऐसे में कोल्ड स्टोर किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने और बेहतर मूल्य मिलने तक इंतजार करने का अवसर देगा।
70 एकड़ में हो रही झींगा मछली की खेती
मत्स्य विभाग किसानों की आय बढ़ाने के लिए झींगा उत्पादन को लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। रोलद और आसपास के क्षेत्रों में करीब 70 एकड़ भूमि पर झींगा मछली की खेती की जा रही है। कोल्ड स्टोर शुरू होने के बाद किसान ऑफ सीजन में भी बाजार की मांग के अनुरूप अपनी उपज बेच सकेंगे जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी की संभावना है। वर्तमान में बाजार में झींगा मछली 400 से 700 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिकती है जबकि ऑफ सीजन में गुणवत्ता और आकार के अनुसार इसके दाम एक हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में भंडारण की यह सुविधा किसानों के लिए आर्थिक रूप से काफी लाभकारी साबित हो सकती है।
एक एकड़ में सालाना 10 टन तक उत्पादन की संभावना
विशेषज्ञों के अनुसार एक एकड़ क्षेत्र में बने तालाब से एक चक्र में चार से पांच टन तक झींगा मछली का उत्पादन किया जा सकता है। यदि किसान साल में दो बार बीज डालते हैं तो आठ से दस टन तक उत्पादन संभव है। प्रोटीन से भरपूर होने के कारण बाजार में झींगा मछली की मांग लगातार बनी रहती है। झींगा पालन की विशेषता यह भी है कि इसे मीठे और खारे दोनों प्रकार के पानी में किया जा सकता है। जिन क्षेत्रों में भूमि की लवणता अधिक होने के कारण पारंपरिक फसलें बेहतर नहीं हो पातीं, वहां झींगा उत्पादन किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बनकर उभर रहा है। विभाग किसानों को अनुदान और तकनीकी सहायता भी देता है।
जिले में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। रोलद क्षेत्र में किसान झींगा मछली की खेती कर रहे हैं। कोल्ड स्टोर शुरू होने के बाद उन्हें अपनी उपज सुरक्षित रखने और बेहतर दाम मिलने पर बेचने का अवसर मिलेगा। विभाग की ओर से कोल्ड स्टोर निर्माण और मत्स्य पालन के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत सब्सिडी भी उपलब्ध कराई जाती है।
- मंजू बाला, जिला मत्स्य अधिकारी, सोनीपत