सोनीपत। खरीफ सीजन में किसानों के सामने खाद की किल्लत ना हो, इसके लिए कृषि विभाग ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत खाद विक्रेताओं से स्टॉक का रिकॉर्ड मांगा गया है। इसके लिए सोमवार को खाद विक्रेताओं की बैठक भी बुलाई गई है। इसकी अध्यक्षता कृषि उपनिदेशक करेंगे। बैठक में मई से सितंबर के बीच किसानों के सामने आने वाली खाद की किल्लत को दूर करने पर मंथन किया जाएगा।
रबी सीजन अंतिम चरण में है। जिले में सरसों की कटाई लगभग पूरी कर ली गई है। अधिकतर हिस्सों में गेहूं की कटाई प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है। गेहूं कटाई व भूसा निकालने का कार्य पूर्ण होते ही मई के पहले सप्ताह से खरीफ सीजन की फसलों के विशेषकर हरे चारे की फसलों की बिजाई शुरू की जाएगी। जून के मध्य में धान की रोपाई का कार्य भी शुरू हो जाएगा। इस समय में यूरिया खाद की मांग एकदम से बढ़ जाती है। ऐसे में किसानों को खाद की किल्लत न झेलनी पड़े, इसके लिए कृषि विभाग समय रहते तैयारियों को पूरा करने में जुट गया है।
जिले में होती है करीब 15 हजार मीट्रिक टन की खपत
जिले में करीब दो लाख हैक्टेयर भूमि में खरीफ सीजन की फसलों की बिजाई की जाती है। इसमें धान, कपास, बाजरा, ज्वार, अरहर सहित विभिन्न सब्जियां उगाई जाती हैं। मई से शुरू होने वाली यूरिया खाद की मांग जून व जुलाई में बढ़कर करीब 15 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच जाती है। हालांकि डीएपी खाद की मांग यूरिया के मुकाबले कम होती है। कृषि विभाग इस बार नैनो यूरिया व डीएपी को भी बढ़ाने के लिए प्रयासरत है।
प्राकृतिक खेती करने के लिए किया जाएगा प्रेरित
कृषि विभाग पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध करवाने की रुपरेखा तैयार करने के साथ ही प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रेरित कर रहा है। जिले में इस बार करीब 400 एकड़ भूमि में किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। खेती में कार्बन की मात्रा को बढ़ाने के लिए जैविक खाद के इस्तेमाल को लेकर भी किसानों को जागरूक किया जाएगा।
वर्जन
खरीफ सीजन में किसानों को पर्याप्त खाद उपलब्ध करवाने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए खाद विक्रेताओं से स्टॉक का रिकॉर्ड मांगा गया है। इसके अनुसार ही आगामी रूपरेखा तैयार की जाएगी। इसके लिए खाद विक्रेताओं की बैठक बुलाई गई है। इसमें इस विषय में गहन मंथन किया जाएगा।
डॉ. पवन शर्मा, कृषि उपनिदेशक, सोनीपत