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रंग पंचमी आज : देवताओं को रंग अर्पित करने से समाप्त होते हैं कुंडली के दोष

Sat, 30 Mar 2024 01:16 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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सोनीपत। होली के पांच दिन बाद चैत्र के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाए जाने वाले रंग पंचमी के त्योहार को लेकर लोगों में उत्साह बना हुआ है। इस दिन कान्हा जी व राधा जी को रंग अर्पित करने की परंपरा है। रंग पंचमी के साथ ही रंगों के इस उत्सव का समापन होता है। रंग पंचमी को श्रीपंचमी या देव पंचमी भी कहा जाता है। कई स्थानों पर इस त्योहार का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस दिन गुलाल, अबीर देवताओं को अर्पित करने पर कुंडली में मौजूद दोष समाप्त हो सकते हैं।
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ज्योतिषाचार्य पंडित मनमोहन मिश्रा का कहना है कि रंगों का त्योहार फाल्गुन मास की बसंत पंचमी से शुरू होता है और रंग पंचमी पर संपन्न होता है। मान्यता है कि रंग पंचमी के दिन ही भगवान कृष्ण ने राधा रानी के साथ होली खेली थी, ऐसे में इस दिन श्री कृष्ण और राधा रानी की पूजा की जाती है। इस दौरान कान्हा और राधा जी को रंग अर्पित किया जाता है। माना जाता है कि इस दिन देवतागण धरती पर आकर रंग, गुलाल या अबीर से होली खेलते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुलाल जब हवा में उड़ाया जाता है और जिस भी व्यक्ति पर यह गुलाल आकर गिरता है, उसे देवी-देवताओं की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
यह रहेगा मुहूर्त
पंचमी तिथि का आरंभ : 29 मार्च को रात 8 बजकर 20 मिनट पर हो रहा है।
पंचमी तिथि का समापन : 30 मार्च को रात 9:13 बजे होगा। (उदया तिथि के अनुसार, रंग पंचमी का त्योहार 30 मार्च शनिवार के दिन मनाया जाएगा)

देवताओं संग होली खेलने का समय : 30 मार्च को सुबह 07:46 बजे से सुबह 09:19 बजे तक।
रंग पंचमी की पौराणिक कथा
ज्योतिषाचार्य पंडित मनमोहन मिश्रा ने बताया कि पौराणिक कथा के अनुसार जब कामदेव ने भगवान शिव की तपस्या में विघ्न डाला, तब शिवजी ने क्रोधित होकर उन्हें भस्म कर दिया था। तब देवी रति और अन्य देवताओं के विनती करने पर शिवजी ने कामदेव को पुनः जीवित कर दिया। जिस कारण सभी देवी-देवता प्रसन्न हो गए और उन्होंने रंगोत्सव मनाया। मान्यता है कि इसके बाद से ही रंग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है।
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