तीन दिन तक हुई बारिश से जिले में करीब 6 हजार एकड़ भूमि में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। जिससे खरीफ सीजन की फसलों के खराब होने का खतरा बना हुआ है। जलभराव से फसलों को खराब होने से बचाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसके लिए 117 पंपसेट लगाकर खेतों में भरे पानी की निकासी की जा रही है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि जलभराव होने से फसलों के उत्पादन में करीब 20 फीसदी तक नुकसान संभावित है। कपास व बाजरे की फसल पर सबसे अधिक खतरा है। जलभराव से फसलों में हुए नुकसान का सही आंकलन एक सप्ताह के बाद ही हो सकेगा।
जिले में 90 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान और करीब पांच हजार हेक्टेयर भूमि पर बाजरा व चार हजार हेक्टेयर में कपास की फसल उगाई गई है। तीन दिनों तक हुई झमाझम बारिश से जिले के अधिकतर क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान, बाजरा, कपास, मक्का व गन्ने के खेतों में जलभराव होने से किसानों को अपनी फसल खराब होने का डर सताने लगा है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि बारिश से धान की फसल को अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ है। बारिश के साथ तेज हवाएं न चलने से धान की फसल खड़ी है। ऐसे में उत्पादन पर करीब 10 फीसदी ही प्रभाव पड़ सकता है। यह प्रभाव भी अगेती फसलों पर ही दिखाई देगा। जिन क्षेत्रों में कपास उगाया है वहां दो से तीन दिन तक अगर खेत से पानी निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो कपास के खेत में 20 फीसदी तक नुकसान पहुंच सकता है। यही हाल बाजरे की फसल का भी है। हरे चारे की फसल ज्वार को भी हल्का नुकसान है। कृषि अधिकारियों ने कहा कि अगर मक्के के खेत में पानी जमा है तो मक्के को बचाना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में हरे चारे का संकट गहरा सकता है।
उपायुक्त ने 22 गांवों का दौरा कर लिया जलभराव की स्थिति का जायजा
गोहाना। गोहाना उपमंडल के अंतर्गत आने वाले 22 गांवों का दौरा करते हुए उपायुक्त ललित सिवाच ने खेतों में जलभराव की स्थिति का जायजा लिया। उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राथमिकता के आधार पर पानी निकासी के प्रयासों को गति दी जाए। दौरे की शुरुआत चिटाना गांव से की। उपायुक्त ने ग्रामीणों से मुलाकात कर खेतों में जल ठहराव की स्थिति की जानकारी ली। ग्रामीणों की मांग अनुसार पंपसेट लगवाने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि वे भी अपने स्तर पर डीजल पंपसेट का प्रयोग कर पानी निकासी के प्रयास करें, डीजल का खर्च प्रशासन वहन करेगा। ग्रामीणों की मांग पर बिजली निगम के एसई को आवश्यकतानुसार विद्युत आपूर्ति देने के निर्देश दिए। इस दौरान एसडीएम आशीष कुमार, जिला राजस्व अधिकारी हरिओम अत्री, एक्सईएन प्रशांत कौशिक, कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. अनिल सहरावत, डॉ. देवेंद्र कुहाड़, सर्वजीत सिंह, कैलाशचंद्र, गुलशन कुमार, नायब तहसीलदार प्रमोद कुमार, रविंद्र कुमार मौजूद रहे।
ड्रेनं नंबर-8 का किया निरीक्षण
उपायुक्त ललित सिवाच ने ड्रेन नंबर-8 का निरीक्षण करते हुए जलस्तर का जायजा लिया। मोई हुड्डा में 83-हेड पर जाकर जलस्तर की समीक्षा की। खानपुर कलां में तुरंत प्रभाव से फिरनी की मरम्मत के निर्देश दिए। बली ब्राह्मणान, कटवाल व खेड़ी दमकन के ग्रामीणों ने बिजली आपूर्ति में वृद्धि की मांग की। जिसे उपायुक्त ने पूरा करने का आश्वासन दिया। उपायुक्त ने चिटाना, सिटावली, कैलाना, माजरी, कासंडा, कासंडी, खानपुर, ककाना, भादरी, न्यात, खेड़ी दमकन, सिकंदरपुर माजरा, पुठी, बड़ौता व नगर गांवों का दौरा किया। उपायुक्त ललित सिवाच ने गांव रभड़ा व खानपुर में ग्रामीणों को भरोसा दिया कि जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के प्रयास करेंगे। इसके लिए एसडीएम गोहाना को निर्देश दिए कि वे विश्वविद्यालय कुलपति के साथ बैठक कर प्रयासों को गति दें। निकासी के लिए ड्रेन की कनेक्टिविटी के लिए प्रस्ताव तैयार करें। साथ ही रभड़ा में ढाई से तीन किलोमीटर पाइप लाइन डालकर ड्रेन में निकासी की व्यवस्था के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। गोहाना विश्राम गृह में अधिकारियों के साथ बैठक कर उचित निर्देश दिए। जिन ग्रामीणों ने अतिरिक्त पंपसेट लगवाने की मांग की है, वहां तुरंत व्यवस्था की जाए।
पानी की निकासी के लिए 24 घंटे बिजली आपूर्ति के आदेश
तीन दिन तक हुई बारिश से खेतों में जलभराव की स्थिति हो गई है। जिससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या को देखते हुए उपायुक्त के आदेश के बाद बिजली निगम के अधीक्षण अभियंता संदीप जैन ने खेतों में पानी निकासी के लिए 24 घंटे बिजली आपूर्ति के आदेश जारी कर दिए है। आदेश तभी लागू होंगे, जब सिंचाई विभाग के संबंधित क्षेत्र के अधिकारी बिजली निगम को पत्र लिखकर बिजली आपूर्ति की मांग करेंगे। जिन क्षेत्र में पानी निकासी की आवश्यकता नहीं है, वहां पहले की तरह रोजाना सात घंटे बिजली मिलती रहेगी।
बारिश के बाद टीमों का गठन कर खेतों का सर्वे कराया गया है। जिले में करीब 6 हजार एकड़ भूमि में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। खेतों से पानी निकासी के प्रबंध किए जा रहे हैं। किसानों से भी आह्वान किया है कि वे खेतों से पानी निकासी का प्रबंध करें, ताकि फसलों को नुकसान से बचाया जा सके। जलभराव से फसलों को हुए नुकसान का सही आंकलन सप्ताह के बाद ही लगाया जा सकेगा।
डॉ. अनिल सहरावत, कृषि उपनिदेशक, सोनीपत