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सिंघु बॉर्डर पर डटे किसान, बोले- अब पीएम व गृह मंत्री से करेंगे बात, लिखित में मिले न्योता

Sun, 29 Nov 2020 12:45 PM IST
रोहतक ब्यूरो अंकित चौहान, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
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बोघ सिंह मानसा और गुरनाम सिंह चढूनी। - फोटो : अमर उजाला
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कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली कूच कर रहे पंजाब के किसानों को रोकने के बाद से वे नेशनल हाईवे 44 के सिंघु बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं। जहां पहले सरकार ने उनको रोकने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की हुई थी, वहीं अब किसानों को दिल्ली में जाने के लिए कहा जा रहा है तो वे एनएच 44 से हटने को तैयार नहीं हैं।

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पंजाब के किसानों के जत्थे लगातार आ रहे हैं तो अब उनको हरियाणा-यूपी के किसानों का साथ भी मिलना शुरू हो गया है और सिंघु बॉर्डर पर शनिवार को दोनों प्रदेशों के काफी किसान पहुंचे। वहीं अब किसान नेता सरकार को नरम पड़ता देखकर किसी तरह का आश्वासन नहीं चाहते हैं।


किसान नेताओं ने यह साफ कर दिया है कि वे सिर्फ पीएम व गृहमंत्री से बातचीत के लिए तैयार हैं और उसके लिए भी बुलावा लिखित में मिलता है तो तभी बात होने की उम्मीद है।
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सिंघु बॉर्डर पर जहां शुक्रवार तक केवल पंजाब के किसानों ने पहुंचकर दिल्ली में घुसने का प्रयास किया था, लेकिन पुलिस के साथ झड़प होने के बाद वे एनएच 44 पर पड़ाव डालकर धरने पर बैठ गए थे। वहीं अब उनको लगातार एनएच 44 से हटकर बुराड़ी के मैदान में जाने के लिए कहा जा रहा है और इसके लिए दिल्ली के अधिकारियों का उनके पास कई बार संदेश आ चुका है। उसके बाद भी किसान एनएच 44 से उठने को तैयार नहीं हैं। क्योंकि पंजाब से लगातार किसान अभी आ रहे हैं और पंजाब के किसानों का साथ देने के लिए शनिवार को सोनीपत, रोहतक, झज्जर, पानीपत के काफी किसान भी पहुंच गए।

 

 

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सिंघु बॉर्डर जाते यूपी के किसान। - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा के एक हजार से ज्यादा किसान भी पंजाब के किसानों संग सिंघु बॉर्डर पर एकत्रित हैं। इनके अलावा हरियाणा से सटे यूपी की सीमा से करीब 100 से ज्यादा किसान भी सिंघु बॉर्डर पर पहुंचे। इस तरह किसान लगातार बढ़ते जा रहे हैं और वे किसी भी तरह से पीछे हटते नहीं दिख रहे हैं।

पंजाब से अभी लगातार किसान आ रहे हैं और वहां से सभी किसानों के आने के बाद ही मिलकर कोई फैसला लिया जाएगा। किसान मिलकर फैसला लेंगे कि आगे किस तरह का कदम उठाना है। क्योंकि यह किसी एक की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के किसानों की लड़ाई है और सरकार को किसानों की बात माननी पड़ेगी। - गुरनाम सिंह चढूनी, प्रदेशाध्यक्ष भाकियू, हरियाणा।

सरकार अभी तक किसानों को हल्के में लेकर बात भी करने को तैयार नहीं थी। अब किसानों की ताकत देखकर सरकार बात करने के लिए कह रही है लेकिन इस तरह से मौखिक तौर पर कहने से कोई बात नहीं होगी और अब केवल पीएम व गृहमंत्री से बात होगी। सरकार को बातचीत के लिए लिखित में बुलावा भेजना होगा, क्योंकि तभी बात होने की उम्मीद है। अभी किसानों से बातचीत चल रही है और सभी मिलकर फैसला लेंगे। - बोघ सिंह मानसा, अध्यक्ष भारती किसान यूनियन मानसा।
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