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गठवाला खाप का प्रस्ताव : शादियां दिन के समय हाेंगी, लिव-इन रिलेशन का विरोध

Thu, 20 Feb 2025 01:33 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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फोटो 33: सोनीपत के गोहाना स्थित मलिक भवन में मुख्यातिथि कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा को घासी
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गोहाना। बरोदा रोड स्थित मलिक भवन में गठवाला खाप के संस्थापक दादा घासीराम मलिक का जयंती समारोह आयोजित किया गया। इसमें मुख्यातिथि कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने घासीराम मलिक की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उन्होंने कहा कि दादा घासीराम मलिक ने समाज में भाईचारा और नैतिकता के मूल्यों को मजबूत करने के लिए शराब पीने पर पाबंदी लगाने पर जोर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय गठवाला मलिक खाप के प्रधान बलजीत मलिक ने की।
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बलजीत सिंह मलिक ने मलिक खाप उत्थान के लिए कई प्रस्ताव पारित किए। इसमें खास रहा कि शादी समारोह दिन के समय आयोजित हों। डीजे पर द्विभाषी फूहड़ गाने और नाच पर रोक लगे। शादियों और पार्टियों में भोजन की बर्बादी से बचने के हर संभव प्रयास किए जाएं। मृत्यु भोज और दशौरी काज को प्रोत्साहन न दिया जाए। युवाओं में बढ़ रही नशे की प्रवृत्ति पर अच्छे संस्कार और अच्छी शिक्षा प्रदान कर रोकने के प्रयास किए जाएं। गठवाला (मलिक) खाप, समाज की मर्यादाओं और संस्कारों को मद्देनजर रखते हुए लिव-इन रिलेशन जैसे अनैतिक कार्य का विरोध करती है। आसपास के गांवों में शादियां न की जाएं। प्रेम विवाह में माता-पिता की सहमति जरूर ली जाए। गोहाना से महम रोड का नाम दादा घासीराम रोड व राजकीय उच्च विद्यालय आहुलाना का नाम दादा घासीराम के नाम पर रखा जाए। गठवाला मलिक खाप के आदि पुरुष वीर जाटवान मलिक की प्रतिमा सात बास और मलिक खाप की मंजूरी के बाद उनके पैतृक गांव देपल (हांसी) के पार्क में लगाई जाए। गठवाला (मलिक) खाप किसानों की जायज मांगों का समर्थन करती रहेगी।
दादा घासीराम ने औरतों को मान-सम्मान दिलाने पर जोर दिया
कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि दादा घासीराम मलिक ने अपनी तरफ से स्थापित की गई मर्यादा को भंग होने से रोका और समाज में मिसाल स्थापित की। आज भी उनकी ओर से न्याय संगत निर्णयों पर गांवों में पंचायतें अपना निर्णय सुनाती हैं। दादा घासीराम मलिक ने औरतों को मान-सम्मान दिलाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमारे महापुरुषों ने समाज को जो राह दिखाई है, उस रास्ते पर चलने के लिए समय-समय पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। युवा ऐसे कार्यक्रम का हिस्सा बनें, यह सुनिश्चित करें। तभी उनके अंदर बिरादरी के प्रति, समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी की भावना जागेगी।
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