सोनीपत। जिले में कोयले व डीजल से चल रहीं 800 से ज्यादा फैक्ट्रियों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से बड़ी राहत मिली है। क्योंकि यह फैक्ट्रियां अभी पीएनजी के बिना चलती रहेंगी और इनपर ताला भी नहीं लगेगा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से इसको लेकर पत्र जारी कर दिया गया है कि अभी किसी भी फैक्टरी को बंद नहीं कराया जाएगा। यह आदेश इसलिए जारी करना पड़ा, क्योंकि क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी की ओर से फैक्ट्रियों को पीएनजी से नहीं चलाने पर ताला लगाने के लिए नोटिस जारी कर दिया गया था। जबकि जिले में अधिकतर औद्योगिक क्षेत्र में पीएनजी की लाइन ही नहीं है तो ऐसे में फैक्ट्रियों को अभी पीएनजी से चलाना नामुमकिन नहीं है। इसको देखते हुए ही कुंडली इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन ने सरकार व प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को पत्र लिखा था।
जिले में राई, कुंडली, बड़ी, सोनीपत, खरखौदा व मुरथल आदि में औद्योगिक क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। इन औद्योगिक क्षेत्रों में काफी बड़ी संख्या में फैक्टरियां कोयला व डीजल आधारित हैं। जिनमें बॉयलर चलता है, उनमें सभी में कोयला व डीजल का इस्तेमाल होता है और इनकी संख्या 800 से ज्यादा है। जिसकी वजह से प्रदूषण बढ़ रहा है। जबकि पीएनजी का इस्तेमाल करने से वायु प्रदूषण काफी कम हो जाता है। ऐसे में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में कोयला व डीजल आधारित फैक्ट्रियों को पीएनजी से चलाने के निर्देश जारी किए गए थे। इसके साथ ही केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने यह सख्त आदेश जारी किए थे कि पीएनजी से फैक्टरी नहीं चलाए जाने पर उनको बंद करा दिया जाए। जिससे फैक्टरी मालिकों में हड़कंप मचा हुआ था और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फैक्ट्रियों का सर्वे शुरू कर दिया था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश के बाद जिले में अब तक कोयला आधारित 90 फैक्टरियां पीएनजी में तब्दील हो गई हैं, जबकि अन्य को अभी तक पीएनजी से नहीं किया जा सका है। इस कारण ही फैक्ट्रियों को नोटिस जारी करने की कार्रवाई कर दी गई थी। इस बीच ही कुंडली इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन व अन्य फैक्टरी मालिकों ने केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के साथ ही सरकार को पत्र लिखकर पूरी स्थिति से अवगत कराया। बताया गया कि किसी भी जगह पीएनजी की पाइप लाइन नहीं है, ऐसे में पीएनजी की व्यवस्था कैसे की जाएगी। इस तरह फैक्टरी नहीं चलाई जा सकती हैं और यहां अधिकतर फैक्टरी बंद हो जाएंगी। इस तरह पाइप लाइन नहीं होने की सरकारी स्तर पर समस्या को देखते हुए केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने फैक्टरी मालिकों को बड़ी राहत दी है। अब उन फैक्टरी को बंद नहीं किया जाएगा जो पीएनजी से नहीं चल रही हैं।
मुरथल, सबौली, नाथूपुर रोड पर नहीं हैं पीएनजी लाइन
सोनीपत में कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में जरूर कुछ जगह पीएनजी लाइन हैं, लेकिन वहां भी पूरे औद्योगिक क्षेत्र में लाइन नहीं डाली हुई है। क्योंकि गेल इंडिया की ओर से सोनीपत में लाइन बिछाई गई, लेकिन औद्योगिक क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया है। इस कारण ही मुरथल, सबौली, नाथूपुर रोड पर पीएनजी की लाइन अभी तक नहीं डाली गई है। इस तरह जब गैस लाइन ही नहीं डली होगी तो फैक्टरी गैस से कैसे चलाई जाएंगी। इस बड़ी समस्या से कुंडली इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन ने केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड व सरकार को अवगत कराया। जिसके बाद फैक्ट्रियों को कुछ राहत दी गई है।
कोयला के मुकाबले तीन गुणा तक खर्च बढ़ेगा
इस समय वह सभी फैक्टरी कोयले व डीजल से चल रही हैं, जिनमें बॉयलर लगा हुआ है। कुंडली इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन के प्रधान सुभाष गुप्ता बताते हैं कि यह ठीक है कि प्रदूषण होने से रोका जाना चाहिए। लेकिन सरकार को ऐसा कुछ प्रावधान करना चाहिए, जिससे फैक्टरी मालिकों को ज्यादा परेशानी नहीं हो। क्योंकि इस समय पीएनजी से फैक्टरी चलाते हैं तो कोयला के मुकाबले खर्च तुरंत तीन गुणा बढ़ जाता है। उनका कहना है कि अगर फैक्टरी में एक दिन में 5 हजार रुपये का कोयला खर्च होता है तो वह खर्च सीधा 15 हजार पर पहुंच जाएगा। इसलिए सरकार को ऐसा कोई प्रावधान करना चाहिए कि फैक्ट्रियों के लिए पीएनजी के दाम में कुछ राहत करनी चाहिए।
जिले में काफी जगह औद्योगिक क्षेत्रों में अभी तक पीएनजी की लाइन ही नहीं है। ऐसे में फैक्ट्रियों को पीएनजी से चलाने का दबाव नहीं होना चाहिए। यह जरूर है कि धीरे-धीरे जिस तरह से लाइन डलती रहेगी, उसी तरह से कोयला बंद करके पीएनजी से फैक्टरी चलानी शुरू कर दी जाएगी। क्योंकि किसी भी फैक्टरी मालिक पर दबाव तभी दिया जाता है, जब वहां सरकार की ओर से लाइन बिछवाई गई हो। हालांकि केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की ओर से अभी राहत दी है और यह फैक्टरी मालिकों के लिए राहत देने वाला निर्णय है।
-सुभाष गुप्ता, प्रधान कुंडली इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन
जिले में सभी कोयला पर चल रही फैक्ट्रियों को पीएनजी से चलाने के आदेश जारी किए गए थे। लेकिन यहां अधिकतर जगह गैस पाइप लाइन ही नहीं है, जिससे सभी को पीएनजी से कराया जाना अभी मुश्किल है। जिन जगहों पर गैस पाइप लाइन है, वहां अब तक 90 फैक्ट्रियों को पीएनजी में तब्दील किया जा चुका है। पर्यावरण संरक्षण के साथ ही प्रदूषण नियंत्रण को लेकर लगातार बेहतर पहल की जा रही है।
-बलराज अहलावत, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी