संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। प्रदूषण का स्तर कम होने का नाम नहीं ले रहा है। वातावरण में सुबह-शाम हल्का स्मॉग छाने से लोगों को परेशानी हो रही है। प्रदूषण का स्तर दूसरे दिन भी गंभीर स्तर पर बना रहा, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी के साथ आंखों में जलन की समस्या हो रही है। जिले में एक्यूआई दूसरे दिन 416 दर्ज किया गया। साथ ही पीएम-10 का स्तर 500 और पीएम 2.5 का स्तर 500 दर्ज किया गया। तापमान में गिरावट और हवा के ठहराव के चलते प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। हवा में हानिकारक गैसों और कार्बन कणों की मात्रा मानक से कई गुना ज्यादा हो गई है।
वातावरण में प्रदूषण बढ़ने से सांस लेने में दिक्कत व आंखों में जलन होने लगी है। साथ ही गले में खराश के मरीज भी बढ़ने लगे हैं। प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह हवा की धीमी गति बताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार जब तक हवा की गति तेज नहीं होती, तब तक प्रदूषण की मार लोगों को झेलनी पड़ेगी। सुबह तापमान कम होने पर प्रदूषण की परत घनी हो जाती है, जबकि दोपहर में इसका स्तर कुछ कम हो जाता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अलर्ट जारी किया है।
कमजोर पश्चिमी विक्षोभ ने बढ़ाई मुसीबत
मौसम विशेषज्ञ डॉ. प्रेमदीप सिंह ने बताया कि पांच दिन से धूल भरा प्रदूषित वातावरण बना हुआ है। इसका मुख्य कारण कमजोर पश्चिमी विक्षोभ है, जो पहाड़ों की तरफ बढ़ा। इससे धीमी गति से पूर्वी हवा चलने से वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ गई, जिससे धूल तथा अन्य प्रदूषक तत्व निचले वातावरण में बने हुए हैं। इससे रात के तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
मौसम 10 नवंबर तक शुष्क रहने की संभावना है। 5 व 6 नवंबर को उत्तरी व उत्तरी पश्चिमी हवा हल्की गति से चलने से प्रदूषण में थोड़ी कमी आने की संभावना है। 7 नवंबर को एक अन्य कमजोर पश्चिमी विक्षोभ पहाड़ों की तरफ बढ़ने से 8 व 9 नवंबर को पूर्वी हवा चलने और आंशिक बादल छाने की संभावना है। 10 नवंबर से फिर से उत्तरी व उत्तर पश्चिमी हवा मध्यम गति से चलने से प्रदूषण से राहत की संभावना बन रही है।
प्रदूषण का स्तर ज्यादा खतरनाक बना हुआ है। इससे बचकर रहना हितकर है। खुली हवा में सांस लेने से कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। सांस लेने में परेशानी होने या आंखों से ज्यादा पानी आने पर चिकित्सक से संपर्क करें।
-डॉ. प्रेमदीप सिंह, मौसम वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, सोनीपत।