संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। जिलेभर में रविवार को अहोई अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। इस बार अहोई अष्टमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, शुभ योग व शुक्ल योग बन रहे हैं। यह सभी योग शुभ व मांगलिक कार्यों के लिए अच्छे माने जाते हैं। हर वर्ष यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। वहीं अहोई अष्टमी पर्व को लेकर शनिवार को बाजार में महिलाओं की चहल-पहल रही। पर्व को लेकर महिलाओं ने जमकर खरीदारी की।
महिलाएं अहोई अष्टमी को संतान की दीर्घायु के लिए व्रत करती हैं और अहोई माता की पूजा करती हैं। अहोई अष्टमी का व्रत करवा चौथ के चार दिन बाद रखा जाता है, इसलिए 5 नवंबर को माताएं यह व्रत करेंगी और तारों का उदय होने के बाद उन्हें अर्घ्य देकर व्रत का पारण करेंगी। दिवाली की पूजा से आठ दिन पहले पड़ने वाला यह व्रत उत्तर भारत की महिलाएं सबसे ज्यादा रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संतान प्राप्ति के लिए अहोई अष्टमी के दिन पूजा से संबंधित कुछ उपाय भी है।
इन उपायों के करने से सभी मनोकामनाएं जल्द पूरी होती हैं। चिटाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शोनक ने बताया कि अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। यह व्रत निर्जला होता है और इसमें तारों को देखने की परंपरा है। माताएं अपनी संतान की सुरक्षा, उत्तम स्वास्थ्य व सुखी जीवन के लिए अहोई माता का व्रत रखती हैं। अहोई अष्टमी पर्व को लेकर महिलाएं बाजार में अहोई, पूजा-अर्चना का सामान व अहोई के चित्र खरीदती नजर आई।
इस विधि से मनाया जाता है अहोई अष्टमी का पर्व
मान्यता है कि अहोई पूजन के लिए शाम के समय घर की उत्तर दिशा की दीवार पर गेरू या पीली मिट्टी से आठ कोष्ठक की एक पुतली बनाई जाती है। उसी के पास सेह व उसके बच्चों की आकृतियां बनाई जाती हैं। विधिपूर्वक स्नान, तिलक आदि के बाद खाने का भोग लगाया जाता है। समृद्ध परिवार इस दिन चांदी की अहोई बनवाकर भी पूजन करते हैं। इसी के साथ कुछ जगह चांदी की अहोई में दो मोती डालकर विशेष पूजा करने का भी विधान है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, संतान प्राप्ति के लिए अहोई अष्टमी के दिन माता अहोई के साथ भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा भी की जाती है। पूजन में इनको दूध-भात का भोग लगाएं। पूजन के खाने में से एक हिस्सा गाय व उसके बछड़े के लिए निकाला जाता है। सायंकाल के समय पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाकर मनोकामना मांगी जाती है। ऐसा करने से अहोई माता प्रसन्न होकर मनोकामना जल्द पूरी करती हैं।
कार्तिक मास की कृष्ण अष्टमी का आरंभ 4 नवंबर को आधी रात के बाद 12 बजकर 59 मिनट पर होगा। यानी कि 5 नवंबर की तिथि का आरंभ हो जाएगा और इसका समापन 5 नवंबर को आधी रात के बाद 3 बजकर 18 मिनट पर होगा। इस तरह उदया तिथि के नियमों के अनुसार अहोई अष्टमी का व्रत 5 नवंबर को किया जाएगा। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम को 5 बजकर 33 मिनट से 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।