किसानों ने आंदोलन को दोबारा खड़ा करने के लिए महापंचायत जरूर शुरू की, लेकिन इनसे राजनीतिक पार्टियों को अपनी सियासी जमीन मजबूत करने का रास्ता मिल गया है। किसान महापंचायतों के असर को देखते हुए कांग्रेस, इनेलो और रालोद ने इसकी शुरुआत कर दी है। आम आदमी पार्टी ने उत्तर प्रदेश से महापंचायतों की शुरुआत करने का पूरा खाका तैयार कर लिया है। जहां अधिकतर पार्टियों के नेताओं ने पहले किसान महापंचायतों में मंच साझा किया, वहीं उनमें जुटने वाली भीड़ को देखते हुए अब अलग-अलग अपनी महापंचायतें करनी शुरू कर दी है। यह महापंचायत भी किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यूपी, हरियाणा, राजस्थान तक पहुंच गई है। इनको अन्य राज्यों में करने की तैयारी हो रही है। यह देखना होगा कि महापंचायतों के सहारे राजनीतिक पार्टियां अपनी जमीन को कितनी मजबूत करने में कामयाब होती हैं।
ट्रैक्टर परेड के दौरान बवाल होने के बाद टूटते आंदोलन को जहां भाकियू (रजि) के प्रवक्ता राकेश टिकैत के आंसुओं से संजीवनी मिली तो वहीं किसान महापंचायतों के सहारे किसानों को एकजुट करके दोबारा से बॉर्डर पर लेकर आने की शुरूआत की गई। किसान महापंचायत की शुरुआत यूपी के मुजफ्फरनगर से हुई थी और उस महापंचायत में किसान नेताओं के अलावा रालोद, कांग्रेस समेत अन्य पार्टियों के नेताओं ने मंच साझा किया था। राजनीतिक पार्टियों के किसान महापंचायत में मंच साझा करने को लेकर काफी सवाल भी उठे, लेकिन किसान महापंचायतों में भीड़ को देखते हुए राजनीतिक पार्टियों को एक रास्ता मिल गया। जिसके बाद रालोद ने इसको भुनाने की पूरी योजना बनाते हुए महासचिव जयंत चौधरी ने महापंचायतों का दौर शुरू कर दिया, जिससे वह अपनी खोई हुई जमीन को तलाश कर सके। रालोद का यह सियासी दांव देखकर कांग्रेस भी मैदान में उतर गई और किसानों के इस मुद्दे पर महापंचायत शुरू कर दी गई। इसकी शुरुआत यूपी से जरूर की गई, लेकिन राजस्थान तक होते हुए हरियाणा में महापंचायतों का दौर शुरू कर दिया गया है।
किसानों के समर्थन में इकलौते विधायक अभय चौटाला के इस्तीफा देने के बाद इनेलो भी महापंचायत में पीछे नहीं रहने वाली थी और वह भी महापंचायत करने में लगी है। हालांकि इनेलो ने अन्य पार्टियों की तरह महापंचायतों में तेजी नहीं पकड़ी है। अब आम आदमी पार्टी भी किसानों के इस मुद्दे पर महापंचायतों में भीड़ उमड़ती देखकर मैदान में उतरी है और वह यूपी से इसकी शुरुआत करने की तैयारी कर चुकी है।
पार्टियों के युवा नेताओं ने संभाली कमान
राजनीतिक पार्टियों की इन महापंचायतों में युवा नेताओं ने कमान संभाली हुई है। जहां हरियाणा में अभी तक हुई महापंचायतों में कांग्रेस से राज्यसभा सदस्य दीपेंद्र हुड्डा ने कमान संभाली है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा महापंचायत से दूर दिखाई दे रहे हैं। वहीं यूपी में प्रियंका गांधी मोर्चा संभाल रही हैं। इस तरह ही रालोद में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजित सिंह की जगह उनके बेटे जयंत चौधरी अकेले ही महापंचायत कर रहे हैं।
हरियाणा में महापंचायतों का दिख सकता है बड़ा असर
महापंचायतों की शुरुआत भले ही यूपी से हुई हो, लेकिन उसके बाद हरियाणा में लगातार किसानों व राजनीतिक पार्टियों की महापंचायत हो रही है। इसका बड़ा असर भी हरियाणा में दिख सकता है, क्योंकि ट्रैक्टर परेड के बाद आंदोलन को दोबारा खड़ा करने में सबसे अहम भूमिका हरियाणा की रही है और किसान आंदोलन में सबसे आगे हरियाणा ही दिखाई देता है। ऐसे में किसानों के मुद्दों को लेकर शुरू की गई महापंचायतों के सहारे राजनीतिक पार्टियां यहां सियासी जमीन मजबूत करने में काफी हद तक कामयाब हो सकती हैं।