हाड़ कंपाने वाली ठंड ने बच्चों की मुश्किलें बढ़ा दी है। जुकाम, खांसी, बुखार बिगड़ कर निमोनिया का रूप ले रहा है। सिविल अस्पताल के शिशु रोग विभाग में रोजाना औसतन चार निमोनिया पीड़ित केस आ रहे हैं। ऐसे मामलों में बच्चों को भाप या नेबुलाइजर देकर राहत पहुंचाई जा रही है।
सामान्य अस्पताल में मंगलवार को शिशु रोग चिकित्सक के पास करीब 90 बीमार बच्चे पहुंचे। इनमें ज्यादातर सर्दी-खांसी से पीड़ित रहे। पिछले करीब दस दिन से यह स्थिति बनी हुई है। इसके चलते निमोनिया केस भी बढ़ने लगे हैं। इन दिनों रोजाना ऐसे चार केस सामने आ रहे हैं। ऐसे मरीजों को नेबुलाइज करने के अलावा भांप दी जा रही है। मंगलवार को सामान्य अस्पताल की ओपीडी करीब 2000 रही।
निमोनिया की यह है पहचान
- बच्चा दूध न पीए।
- खाना न खाए।
- तेज बुखार हो।
- सांसें तेज चलना।
निमोनिया से पीड़ित बच्चों का ब्योरा
दिन बच्चे उम्र
एक जनवरी 4 3 माह से 3 वर्ष
दो जनवरी 6 3 माह से 5 वर्ष
तीन जनवरी 4 2 माह से 3 वर्ष
चार जनवरी 5 3 माह से 6 वर्ष
पांच जनवरी 4 2 माह से 6 वर्ष
छह जनवरी 2 2 माह से 14 वर्ष
आठ जनवरी 3 2 माह से 6 वर्ष
नौ जनवरी 4 3 माह से 4 वर्ष
ज्यादातर फीड करने वाले बच्चों में निमोनिया के मामले आ रहे हैं। फीड कराने वाली माताएं खुद ठंड से बचें। उनके बीमार पड़ने से शिशुओं में भी बीमार पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। बच्चों को स्नान कराने से परहेज करें। बच्चों के कपड़े बदलने से पहले कमरे के दरवाजे खिड़की बंद कर लें व हो सके तो थोड़ी देर के लिए हीटर चला लें।
- डॉ. कुलप्रतिभा, बाल रोग विशेषज्ञ