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एसटीएफ ने 25000 रुपये के इनामी पैरोल जंपर को दस साल बाद किया गिरफ्तार

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एसटीएफ सोनीपत की टीम द्वारा पकड़ा गया आरोपी। - फोटो : Sonipat
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सोनीपत। पानीपत में किसान से लूटपाट के बाद हत्या करने के मामले में भगोड़े और 25000 रुपये के इनामी हत्यारे को एसटीएफ सोनीपत की टीम ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपी यूपी के जिला शामली के गांव पावटी का रहने वाला अरशद है। आरोपी ने पानीपत के बापौली में किसान से ट्रैक्टर लूटने के बाद गोली मारकर उसकी हत्या कर दी थी। वह दिल्ली, बहादुरगढ़ और बादली क्षेत्र में नाम बदलकर छिपता रहा। एसटीएफ उसको करनाल न्यायालय में पेश करेगी।
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एसटीएफ प्रभारी सतीश देशवाल ने बताया कि वह मंगलवार को मुख्य सिपाही राजेंद्र, देवेंद्र, राजीव, सिपाही दीपक व अमित के साथ खरखौदा के सैदपुर क्षेत्र में गश्त पर थे। इसी दौरान सूचना मिली कि पैरोल जंपर कुख्यात अरशद यहां से गुजरने वाला है। जिस पर पुलिस ने उसे दबोच लिया। आरोपी अपना गिरोह चलाता था। वह ट्रैक्टर लूटकर उनको बेच देता था। उसने अपने साथी शहजाद के साथ मिलकर वर्ष 2006 में पानीपत के बापौली क्षेत्र से किसान से ट्रैक्टर-ट्राली लूट ली थी। विरोध करने पर किसान की गोली मारकर हत्या कर दी थी। किसान का शव गन्ने के खेत में फेंक दिया था। उसने ट्रैक्टर को राजस्थान में बेचा था और ट्राली घर पर खड़ी कर ली थी। इस मामले में अरशद और शहजाद को पानीपत पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। दोनों अपराधियों को इस मामले में न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
पैरोल लेकर हो गया था फरार
न्यायालय में अरशद ने मां के बीमार होने के आधार पर पैरोल मांगा था। न्यायालय ने उम्र कैद की सजा काट रहे अरशद का पैरोल वर्ष 2010 में स्वीकार कर लिया था। उसको करनाल जेल से पैरोल पर छोड़ दिया गया था। उसके बाद वह फरार हो गया था। उसका पता नहीं लग सका था। इस मामले में पुलिस ने अरशद पर 25000 रुपये का इनाम घोषित किया था। अरशद पर उत्तर प्रदेश में भी लूट के कई मामले दर्ज हैं। वह शामली का हिस्ट्रीशीटर है।
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नाम और रूप बदलकर छिपता रहा
उत्तर प्रदेश में अपराध करने के बाद अरशद हरियाणा भाग आया था। यहां से भागने के बाद वह दिल्ली गया। दिल्ली में वह नाम बदलकर उत्तर प्रदेश की आनंदा दूध डेयरी के वाहन पर चालक लग गया। वह बुलंदशहर से दिल्ली रूट पर वाहन चलाने लगा। इस दौरान उसने अपना रूप बदल लिया और पहचान छिपाने के लिए नाम आरिफ रख लिया। उसके बाद वह आरिफ बनकर बहादुरगढ़ और बादली में फलों के गोदाम पर नौकरी करने लगा।
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