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सोनीपत में धर्मसभा: पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य बोले- मानव जीवन भोगने नहीं, अच्छे कर्म करने के लिए मिला है

Sun, 20 Nov 2022 11:18 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)

सार

पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य बोले कि कुरूक्षेत्र व पानीपत को धर्म, ज्ञान व वीरता के लिए विश्व स्तर पर पहचान मिली है। भव का त्याग करने पर ही भगवान मिलेंगे। चीन-पाक ने हमला किया तो अहिंसा के नाम पर चुप नहीं बैठेगा, मुंहतोड़ जवाब देगा भारत। 
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श्रद्घालुओं को संबोधित करते शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती। प्रवचन सुनते श्रद्घालु। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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गोवर्धनमठ पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि हमें हिंदू होने पर गर्व होना चाहिए। हरियाणा के कुरुक्षेत्र व पानीपत जिले ऐतिहासिक हैं, जिन्हें धरातल पर धर्म, ज्ञान व वीरता के लिए विश्व स्तर पर पहचान मिली है। उन्होंने अध्यात्म व राष्ट्रीयता का संदेश देते हुए श्रीमद्भागवत गीता के अध्यायों का वर्णन किया।

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उन्होंने कहा कि मानव जीवन भोगने के लिए नहीं मिला, अपितु अच्छे कर्म करते हुए भक्ति व ज्ञान मार्ग से स्वयं को ब्रह्म के रूप में जानने के लिए प्राप्त हुआ है। जिसका जन्म हुआ है, उसका मरण भी निश्चित है। हम मोक्ष प्राप्त कर इस चक्र से छुटकारा पा सकते हैं।

राष्ट्रोत्कर्ष अभियान यात्रा के तहत रविवार को हरियाणा के सोनीपत में दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल (डीसीआरयूएसटी) में धर्मसभा का आयोजन किया गया। जिसमें 145वें शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज पहुंचे।
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शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि भारत की भूमि देवताओं से निर्मित भूमि है। ऊपर हिमालय व नीचे समुद्र इस भू-भाग को विशेष बनाता है। भारत एक बार फिर से विश्व गुरु बन सकता है। प्रत्येक हिंदू परिवार को हर रोज एक रुपया व एक घंटा धर्म पर खर्च करना होगा। इस रुपये व समय को अपने आसपास के मंदिर व मठ को विकसित करने पर लगाना होगा।

उन्होंने कहा कि दिन में कम से कम 75 मिनट हमें ईश्वर के ध्यान में लगाने चाहिए, तभी मनुष्य शक्ति प्राप्त कर सकता है। हिंदू अगर स्वयं के अंदर की शक्ति को पहचान ले तो वह एटम बम की तरह शक्तिशाली हो सकता है। शंकराचार्य ने कहा कि मैं किसी पार्टी से संबंध नहीं रखता। मेरी भावना है कि गंगा फिर से निर्मल हो। विकास के नाम पर सूर्य, हवा, पानी व आकाश आदि ऊर्जा के माध्यमों को विकृत किया जा रहा है।

शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि कर्तव्य का निर्वाह करना कभी भी एकांगी नहीं होता। अगर भारत पर चीन, पाकिस्तान या फिर बांग्लादेश जैसे देश हमला करते हैं तो भारत अहिंसा के नाम पर मौन नहीं रहेगा, बल्कि हमलावरों को मुंह तोड़ जवाब देगा।

उन्होंने कहा कि महाभारत के युद्ध से पहले शांति के लिए भगवान श्रीकृष्ण कौरवों के पास महज पांच गांव मांगने के लिए गए थे। लेकिन जब दुर्योधन ने सुई की नोंक के बराबर भी जमीन देने से मना कर दिया तो अधर्म के खिलाफ धर्म को युद्ध के मैदान में खड़ा होना पड़ा था।

उन्होंने कहा कि सृष्टि परमात्मा में मन लगाने के लिए है। जब तक सृष्टि में मन समाहित नहीं होगा, तब तक जीव का कल्याण संभव नहीं होगा। स्वामी निश्चलानंद ने ईश्वर के अस्तित्व को चुनौती देने वालों को बताया कि विश्व में जल नहीं होता तो प्यास नहीं लगती, भोजन नहीं होता तो भूख नहीं लगती। इसी प्रकार मृत्यु न होती तो सच्चिदानंद नहीं होते, जो नश्वरता से परे हैं।

हर मानव नश्वरता व क्षणभंगुरता से ऊपर उठना चाहता है, जिसका केवल मात्र एक ही उपाय है कि हम स्वयं को आत्मस्वरूप में पहचानें। उन्होंने कहा कि जीवन जीविका के लिए नहीं है, बल्कि जीविका जीवन के लिए है और जीवन को सच्चिदानंद को समर्पित कर देना चाहिए।

वेद शास्त्रों से चुराया गया ज्ञान-विज्ञान
शंकराचार्य ने मोबाइल, रॉकेट, कंप्यूटर के आधुनिक युग में भी वेद शास्त्रों की प्रासंगिकता को गंभीरता से समझाया। उन्होंने कहा कि वेद शास्त्रों से ज्ञान-विज्ञान चुराया गया और आधुनिक यंत्रों का सृजन किया गया। डिग्री-डिप्लोमा लेकर भी मानव को रहता है कि उसने कुछ नहीं जाना-समझा। सीधा अर्थ है आत्मज्ञान के बिना सब ज्ञान अधूरा है। वेद शास्त्रों के बिना ज्ञान प्राप्त नहीं किया जा सकता। शंकराचार्य ने कहा कि भव का त्याग करने पर ही भगवान मिलते हैं। भगवान को पाकर हम भव के अधिपति बन सकते हैं।

जूतों के साथ नहीं करने दिया गया प्रवेश
धर्मसभा कार्यक्रम में काफी संख्या में महिलाएं संकल्पित कलश लेकर पहुंची। कार्यक्रम में श्रीमज्जगद्गुरु पुरी शंकराचार्य स्वागत समिति के पदाधिकारियों की ओर से पुख्ता प्रबंध किए गए थे। इस दौरान किसी भी श्रद्धालु को जूतों के साथ कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश नहीं करने दिया गया। कार्यक्रम की व्यवस्था बनाए रखने के लिए एनसीसी कैडेट्स की ड्यूटी लगाई गई थी। बैठने के लिए महिलाओं व पुरुषों के लिए अलग-अलग पंक्तियों का प्रबंध किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर गुरुवाणी से किया गया। इसके बाद कुरुक्षेत्र से जंगमों (जंगम ब्राह्मणों) ने परंपरागत वेशभूषा में भगवान शंकर की स्तुति प्रस्तुत की।

भगवान विष्णु की पादुकाओं के दर्शन के लिए लगी भीड़
धर्मसभा कार्यक्रम में शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज अपने साथ भगवान विष्णु की पादुकाएं लेकर पहुंचे थे। जिनके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सर्वप्रथम विष्णु पादुकाओं का पूजन किया गया। बाद में श्रद्धालुओं को दर्शन करने के लिए विष्णु पादुकाओं तक पहुंचने दिया गया। इस दौरान विधायक मोहनलाल बड़ौली, पूर्व कैबिनेट मंत्री कविता जैन, भाजपा नेता राजीव जैन, ललित बत्रा, डीसीआरयूएसटी के कुलपति डॉ. राजेंद्र कुमार अनायत, रजिस्ट्रार डॉ. सुरेश कुमार, डॉ. ओमप्रकाश आत्रेय, समुंद्र सिंह मलिक, डॉ. पूर्णमल गौड़, सुरेश पाराशर, पवन गुप्ता, नीरज आत्रेय ने भी भगवान विष्णु की पादुकाओं के दर्शन कर नमन किया।

इस मौके पर राकेश अग्रवाल, साहिल अग्रवाल, राजीव गुप्ता, टीकाराम मित्तल, ओडी गर्ग, नीरज शर्मा, मंजू गर्ग, कृष्ण वत्स, सुशील जैन, राजीव अग्रवाल, डॉ. रमेश भारद्वाज, एसके शर्मा, डॉ. निर्मल खंडेलवाल, डॉ. आरके गुप्ता, डॉ. रचना गुप्ता, डॉ. अशोक शर्मा, डॉ. गोविंद शाही, वीरेंद्र कौशिक, प्रवीन वशिष्ठ, डॉ. हरीश आचार्य व डॉ. दिनेश मौजूद रहे।

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