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शिक्षा की शर्तों ने बदले गांवों के निजाम

Tue, 12 Jan 2016 12:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
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पंचायत चुनाव के प्रथम चरण में जिले के सोनीपत, मुंडलाना और खरखौदा ब्लॉक के 120 गांवों की चौधर तय हो गई है। रविवार देर रात तक आए चुनाव परिणामों ने न केवल गांवों का निजाम बदल दिया, बल्कि चौधर संभालने वाले हाथ भी बदल गए हैं। सरकार ने सरपंच बनने के लिए योग्यता तो नाममात्र की रखी थी, लेकिन कुछ पंचायतों की चौधर ऐसे हाथों में आई है, जिस पर गांव भी गर्व कर रहा है। अब डीसी और एसडीएम के साथ बैठकों का एजेंडा समझने वाले ब्रांच मैनेजर (बीमा कंपनी में) और साफ्टवेयर इंजीनियर अपनी पंचायतों के विकास की पूरे आत्मविश्वास के साथ बात कर सकेंगे। इसका मायना यह हुआ कि अब अधिकारी विकास के मामले में ग्रामीणों को गच्चा नहीं दे पाएंगे, क्योंकि अब गांवों में पढ़ी-लिखी सरकार बन गई है। पंचायत चुनावों ने सिर्फ पढ़ी-लिखी सरकार ही नहीं दी है बल्कि कई जगह सामाजिक समीकरण भी बदल गए हैं।
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जवाहरा: 7 लाख का पैकेज छोड़ने ब्रांच मैनेजर को मिली चौधर   
पानीपत जिले की सीमा से सटा सोनीपत जिले का अंतिम गांव जवाहरा का चुनाव परिणाम बेहद चौंकाने वाला रहा। मोदी आर्मी से जुड़े और पानीपत स्थित एक जीवन बीमा कंपनी में ब्रांच मैनेजर की नौकरी करने वाले सुरेंद्र आर्य 60 वोट से सरपंच चुने गए। एमबीए पास सुरेंद्र को कंपनी की ओर से सालाना 7 लाख का पैकेज दिया जा रहा था, लेकिन समाज सेवा की कसक और सरकार के बदले नियमों ने सरपंच के चुनाव के लिए प्रेरित किया। राजनीति से हमेशा दूर रहे परिवार के सदस्य सुरेंद्र ने पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित गांव के सरपंच पद के लिए नामांकन दाखिल किया। ग्रामीणों ने विश्वास करके सुरेंद्र को चौधर सौंप दी। बकौल सुरेंद्र उनका पहला काम गांव में स्टेडियम बनवाना, बैंक खुलवाना और पीने के पानी की व्यवस्था कराना रहेगा, क्योंकि गांव जिला मुख्यालय ही नहीं, बल्कि गोहाना शहर से भी 20 किमी दूर है।

अहमदपुर माजरा: हेडमास्टर का बीटेक पास बेटा बना सरपंच  
मुंडलाना ब्लॉक का दूसरा गांव अहमदपुर माजरा है, जहां 80 प्रतिशत ब्राह्मण समुदाय के लोग रहते हैं। पिता नेतराम सरकारी स्कूल में हेडमास्टर हैं। इनका साफ्टवेयर इंजीनियर बेटा नवीन शर्मा (25) एक महीने पहले दिल्ली से 4 लाख के सालाना पैकेज की नौकरी छोड़कर गांव आया। जमकर एक माह तक गांव में मेहनत की और ग्रामीणों का विश्वास जीता। रविवार देर रात घोषित हुए चुनावी परिणाम में नवीन ने राजेंद्र को 710 वोटों से हराकर जीत हासिल की। बकौल नवीन, गांव की कच्ची गलियां देखकर काफी दुख होता है। सबसे पहले गांव के पिछड़े एरिया का विकास कराया जाएगा।
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मंटिडू़ : घर से नहीं जाने दी बीए पास भतीजे ने चौधर  
प्रदेश सरकार ने नियम बदले, लेकिन खरखौदा ब्लॉक के गांव मटिंडू गांव में चाचा जोगा के परिवार की चौधर 26 साल के पढ़े लिखे भतीजे ने नहीं जाने दी। चुनाव में बीए पास राकेश ने दूसरे प्रत्याशी को 70 वोट से हराकर जीत हासिल की। राकेश ने बताया कि पिछले प्लान में उसके चाचा जोगा सरपंच चुने गए, लेकिन इस बार नियम बदल गए। परिवार में ही चौधर रहे, इसके लिए ग्रामीणों ने उसे चुनाव में खड़ा कर दिया। दूसरी तरफ दो पूर्व सरपंचों का परिवार था। मुकाबले में वह जीत हासिल करने में कामयाब रहा।  

जटौला : पति की हार का बदला लिया एमए पास प्रमिला ने
खरखौदा ब्लॉक के गांव जटौला में इतिहास से एमए पास प्रमिला सरपंच बनी हैं। उन्होंने सुनीता को 205 वोटों से हराया। जीत हासिल करके प्रमिला ने पिछले चुनाव में अपने पति की हार का बदला लिया है। पिछले चुनाव में पति सुदेश उर्फ नप्पल 22 वोट से हार गए थे। नप्पल ने बताया कि गांव में प्रमिला और सुनीता के बीच सीधा मुकाबला था। जिसमें प्रमिला जीत हासिल करने में कामयाब रही।

भठगांव दुराण : सामान्य वर्ग की सीट में अनुसूचित जाति के कर्मवीर जीते
हरियाणा पुलिस से सिपाही के तौर पर रिटायर्ड कर्मवीर ने भठगांव दुराणा में जीत हासिल कर राजनीतिक पंडितों को भी चौंका दिया है। कर्मवीर ने एससी समुदाय से होते हुए सामान्य वर्ग के लिए ओपन सरपंच के मुकाबले में 111 वोटों से पूर्व सरपंच राजीव को हराया। खास बात यह रही कि एक प्लान छोड़कर कर्मवीर की पत्नी नरेश देवी गांव की सरपंच बनी थीं। उस समय सरपंच का पद एससी महिला के लिए रिजर्व था, लेकिन इस बार ड्रा में सरपंच का पद ओपन रखा गया। इसके बावजूद कर्मवीर ने जीत हासिल कर राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया। बकौल कर्मवीर मेरी जीत में सवर्ण समाज के लोगों की भी अहम भूमिका रही है।

गुहणा : दोस्त की पत्नी को सरपंच बनवाकर निभाई दोस्ती
जिले के गुहणा गांव में सरपंच चुनाव में अजीबोगरीब समीकरण निकलकर आए हैं। एससी समुदाय की आठवीं पास पूनम ने 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट हासिल कर शानदार जीत हासिल की। जीत के पीछे उसके पति कप्तान के दोस्त और पूर्व सरपंच रिक्का की अहम भूमिका रही। कप्तान ने बताया कि पहले गुहणा गांव में सरपंच पद ओपन था, लेकिन इस बार एससी महिला के लिए रिजर्व कर दिया गया। पिछले प्लान में सरपंच रहे उसके दोस्त रिक्का चुनाव नहीं लड़ सके। इसके चलते उसने आग्रह किया कि वह अपनी पत्नी को सरपंच का चुनाव लड़वाए, क्योंकि वह आठवीं पास होने से एजूकेशन की शर्त भी पूरी करती है। चुनाव चाहे उसका परिवार लड़ रहा है, लेकिन वह पूरी तरह उसके साथ है। पूरी तरह रिक्का ने गांव वालों के साथ मिलकर उसका साथ दिया। बकौल कप्तान जब रिक्का सरपंच था तब वह ही सारे कामकाज संभालता था। बैंक में काम हो या अधिकारियों से बात करनी हो। वह सरपंच के साथ रहा। आज रिक्का ने उस दोस्ती को निभाकर दिखा दिया।

10वीं पास सरपंचों का दबदबा, 120 गांवों में से छह एमए पास
जिले के तीन ब्लॉक सोनीपत, मुंडलाना और खरखौदा की 120 पंचायतों के सरपंचों और पंचों का चयन हो गया है। एजूकेशन की शर्त के चलते अबकी बार पढ़ी-लिखी सरकार बनी है। अब तक घोषित परिणाम में कुल 117 में 19 आठवीं पास, 79 दसवीं पास, 13 बारहवीं और 6 बीए और एमए पास हैं।

45 गांवों में महिलाओं की चौधर
तीनों ब्लॉक के पंचायत चुनाव में कुल 45 महिलाएं सरपंच चुनी गई हैं। जबकि 72 पुरुषों को गांवों की चौधर मिली। चुने गए सरपंचों में 83 सामान्य वर्ग, 25 एससी और 9 बीसी एवं ओबीसी समुदाय से हैं।
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सोनीपत खंड
टॉप-3 सरपंच प्रत्याशी सबसे ज्यादा वोटों से विजयी हुए
गांव     विजयी    मत    हारे    मत अंतराल
भदाना     महेंद्र    1499    सरदानंद    257    1242
जुआं-1    विनोद    1954    ब्रह्मा    844    1110
बड़वासनी    नीटू उर्फ प्रवीण    1726    शीला    822    904

टॉप-3 सरपंच प्रत्याशी सबसे कल वोटों से विजयी हुए
बोहला    आशारानी    423    सरला    422    01
शहजादपुर    बिजेंद्र    413    दीपक    403    10
तिहाड़ खुर्द    मुकेश    497    कर्मबीर    486    11
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