सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश सरकार की जीत के बाद अब गांवों में पढ़ी-लिखी सरकार बनेगी। शीर्ष अदालत के फैसले के बाद जहां कांग्रेसी सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं भाजपाई खुश हैं। अब नए परिपेक्ष्य में जिले के 6.55 लाख मतदाता 304 गांवों में पंचायत का चुनाव करेंगे। खास बात यह है कि अबकी बार जिला परिषद, सोनीपत, मुरथल और राई ब्लॉक के भी चुनाव हो सकते हैं, क्योंकि पिछली बार मतदाता सूची पूरी नहीं होने से इनके चुनाव घोषित नहीं किए गए थे। गौरतलब है कि 2010 में चुनी गई पंचायतों का कार्यकाल जुलाई 2015 में खत्म हो चुका है। इसी बीच प्रदेश सरकार ने 11 अगस्त को पंचायती राज कानून में संशोधन करके चार शर्त तय की थी। पंचायत चुनाव में भाग लेने के लिए सामान्य श्रेणी का उम्मीदवार 10वीं और महिला, एससी व बीसी पुरुष आठवीं पास होना चाहिए। पंच के लिए एससी वर्ग की महिला पांचवीं पास होनी चाहिए। इतना ही नहीं, घर में शौचालय होने और किसी जघन्य अपराध में शामिल नहीं होने का शपथ पत्र देना भी अनिवार्य किया गया था। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर होने पर सर्वोच्च न्यायालय ने फैसले पर रोक लगा दी थी। बहस के बाद अब शीर्ष ने अदालत ने रोक हटा दी है।
गन्नौर सबसे बड़ा और कथूरा सबसे छोटा ब्लॉक
जिले में कुल आठ ब्लॉक हैं, जिनमें गन्नौर में सबसे ज्यादा 53, जबकि कथूरा में 20 पंचायत हैं। आठ सितंबर को घोषित हुए चुनाव कार्यक्रम के तहत चार अक्तूबर को मुंडलाना और खरखौदा ब्लॉक के चुनाव होने थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की रोक के चलते प्रक्रिया रुक गई थी। दोनों जगह नामांकन दाखिल किए जा चुके हैं। सरकार की शर्तों के तहत भी और बिना शर्तों के तहत भी।
राई, मुरथल और गन्नौर ब्लॉक अतिसंवेदनशील
जिला प्रशासन की ओर से पंचायत चुनाव के मद्देनजर एक सूची तैयार की गई है, जिसमें उत्तर प्रदेश की सीमा के साथ लगते राई, मुरथल और गन्नौर ब्लॉक को सबसे ज्यादा संवेदनशील माना गया है। जबकि राजनीतिक सरगर्मी के चलते गोहाना ब्लॉक संवेदनशील की श्रेणी में आता है। पांच दिसंबर को हरियाणा निर्वाचन आयोग को जिला प्रशासन ने संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों की रिपोर्ट भेजी है। इसमें खरखौदा और मुंडलाना में 15-15, सोनीपत में 36, गोहाना में 15, कथूरा में 8, गन्नौर में 36, मुरथल में 25 व राई ब्लॉक में 52 अतिसंवेदनशील बूथ हैं।