संवाद न्यूज एजेंसी
गोहाना। क्षेत्र में 1.45 लाख एकड़ में उगाई गई धान की फसल की कटाई शुरू हो गई है। पूरी फसल की कटाई के बाद करीब 8.70 लाख क्विंटल पराली निकलने का अनुमान है। फसल अवशेष प्रबंधन के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने से पराली जलाने की आशंका को देखते हुए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने कर्मचारियों की गांववार ड्यूटी लगाई है।
कर्मचारी किसानों को पराली नहीं जलाने और फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जागरूक करेंगे। धान क्षेत्र की मुख्य व्यापारिक फसल है। इसकी अगेती किस्मों की कटाई शुरू हो चुकी है और जल्द ही मशीनों से भी कटाई शुरू होगी। कटाई के साथ ही फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर कृषि विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है।
उपमंडल के कई गांव पराली जलाने को लेकर संवेदनशील हैं। अधिकारियों के अनुसार इन गांवों में पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ स्मॉग की स्थिति बन सकती है, जिससे बच्चों, श्वास रोगियों और वाहन चालकों को परेशानी होती है।
40 प्रतिशत पराली का पशु चारे में होता है इस्तेमाल
कृषि अधिकारियों के अनुसार कुल निकलने वाली पराली में से करीब 40 प्रतिशत का इस्तेमाल पशु चारे के रूप में हो जाता है। शेष पराली का प्रबंधन चुनौती बना हुआ है। विभाग की ओर से किसानों को फसल अवशेष नहीं जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है और गांवों में किसान सभाएं आयोजित की जा रही हैं।
पिछले साल पराली जलाने की 68 घटनाएं
अधिकारियों के अनुसार पिछले साल जिले में फसल अवशेष जलाने की 68 घटनाएं सामने आई थीं। इस बार घटनाओं को न्यूनतम करने के लिए कर्मचारियों की गांववार ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा सरकार की ओर से सैटेलाइट के माध्यम से भी निगरानी रखी जाएगी। फसल अवशेष जलाने पर प्रतिबंध है।
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धान की कटाई शुरू होने के साथ ही किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जागरूक किया जा रहा है। कर्मचारी गांवों में जाकर किसान सभाएं कर रहे हैं। किसानों से पराली नहीं जलाकर पर्यावरण संरक्षण में भागीदार बनने की अपील की जा रही है।
डॉ. राजेंद्र मेहरा, एसडीओ, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, गोहाना