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अनदेखी : देश के सबसे हाईटेक एक्सप्रेस-वे पर गड्ढे, झेलने पड़ रहे झटके

Thu, 04 Apr 2024 10:22 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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सोनीपत। कुंडली-गाजियाबाद-पलवल (केजीपी) ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) भले ही देश में सबसे हाईटेक हाईवे में शुमार करता हो, लेकिन अब इस पर जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण पर 5763 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन अब एक्सप्रेस-वे पर गड्ढों के चलते वाहन चालकों को लगातार झटके झेलने पड़ रहे हैं।
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एक्सप्रेस-वे पर गड्ढे भरने में भी लापरवाही बरती जा रही है। सड़क पर जिन स्थानों पर पर दरार आ गई थी, वहां उनको तारकोल और रोड़ी डलवाकर पैचवर्क करा दिया गया, लेकिन तारकोल निकल गया है। केजीपी पर रोजाना लगभग 65 हजार वाहन टोल देकर गुजरते हैं। जीटी रोड से लेकर केजीपी के टोल प्लाजा तक सवा किलोमीटर क्षेत्र में सड़क पर 60 से ज्यादा गड्ढे बने हुए हैं।

कुंडली से गाजियाबाद होते हुए पलवल तक ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे की हालत फिर से बिगड़ने लगी है। कुंडली के पास बीसवां मील से शुरू होने वाले एक्सप्रेस-वे पर कई जगह गड्ढे बने हुए हैं। एनएचएआई के अधिकारी इस एक्सप्रेस-वे को देश का सबसे हाईटेक हाईवे मानते हैं। इसके निर्माण में 5763 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यह एक्सिस कंट्रोल एक्सप्रेस-वे है, जिस पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था, सौर ऊर्जा सिस्टम, कला एवं संस्कृति को दर्शाती कलाकृतियां बनाई गई हैं। इसके साथ ही देश की पहली डिजिटल आर्ट गैलरी भी बनाई गई है। इस एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन 27 मई 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कराया गया था।
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कई जगह पैचवर्क होने से सामान्य सड़कों की तरह यह तारकोल वाला हाईवे बनता जा रहा है। तारकोल भी अब उखड़ गई है। समय पर ठीक से मरम्मत न होने के कारण पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पर हुए गड्ढे गहराते जा रहे हैं। गड्ढों को तारकोल से भरने से स्थिति ज्यादा विकट होती जा रही है। अब एक्सप्रेस-वे पर जगह-जगह गड्ढे होने के कारण दरारें भी आनी शुरू हो गई हैं, जो बढ़ती ही जा रही हैं। करीब छह माह पूर्व तारकोल डाला गया था, लेकिन पकड़ नहीं होने के कारण फिर गड्ढे गहरे होते जा रहे हैं।

दुर्घटना का बना रहता है अंदेशा

ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे (ईपीई) पर जगह-जगह सड़क धंसने और टूटने की वजह से गाड़ियां हिचकोले खा रही हैं। 100 और 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती गाड़ियां गड्ढों की वजह से कभी भी दुर्घटनाग्रस्त हो सकती हैं। एक्सप्रेस-वे पर कई स्थान पर दो हिस्सों को जोड़ने के लिए तारकोल की परत चढ़ाई गई है। बारिश के कारण यह तारकोल की परत भी उखड़ गई है, इसकी वजह से वाहन झटके खा रहे हैं। टोल शुल्क वसूलने के बावजूद यात्रियों को सुहाने सफर का अहसास नहीं हो रहा।



अनदेखी के कारण स्ट्रीट लाइट के पोल भी टूटे

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से एक्सप्रेस वे का निर्माण सीमेंट व कंक्रीट से किया गया है। दावा किया गया था कि इस पर 200 साल तक गड्ढे नहीं होंगे, लेकिन हकीकत कुछ और बयां कर रही है। जीटी रोड से लेकर जाखौली टोल प्लाजा तक जगह-जगह गड्ढे बने हुए हैं। यहां तक कई स्थानों पर स्ट्रीट लाइट के पोल भी टूटे पड़े हैं जिनको ठीक कराने के लिए एनएचएआई की ओर से कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।



वर्जन

केजीपी पर गड्ढे बनने व टूटी लाइट का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अधिकारियों के साथ कुंडली-गाजियाबाद-पलवल पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का निरीक्षण किया जाएगा। अगर कहीं कमी मिलती है तो उसे दूर किया जाएगा। वाहन चालकों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। -धीरज सिंह, परियोजना निदेशक, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण।
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