सोनीपत। राई और कुंडली क्षेत्र में भूमिगत जल पीने लायक नहीं रह गया है। भूमि से निकल रहे पेयजल में टीडीएस जानलेवा स्तर पर पहुंच गया है। ऐसे में क्षेत्र के एक लाख से अधिक लोगों को कैंपर या बोतल के पानी के सहारे रहना पड़ रहा है। साथ ही हजारों लोगों ने आरओ सिस्टम लगवा रखे हैं।
राई व कुंडली क्षेत्र में वर्ष 2003 के आसपास तेजी से औद्योगिक क्षेत्र बसाया गया। जिससे यहां ग्रामीणों के साथ बाहर से आकर रहने वाले लोगों की जनसंख्या भी तेजी से बढ़ने लगी। अब राई व कुंडली क्षेत्र में जहां स्थानीय ग्रामीणों की संख्या हजारों में हैं वहीं बिहार व यूपी समेत अन्य प्रदेशों से आकर बसे लोगों की संख्या लाखों में पहुंच गई है।
अकेले राई क्षेत्र में 35 से 40 हजार लोग रह रहे हैं तो कुंडली में एक लाख से अधिक लोग हैं। भूजल दूषित होने के बाद यहां करीब सात साल से पानी भी बिकने लगा है। क्षेत्रवासी यह तो जानते थे कि पानी अमूल्य धरोहर है लेकिन अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी का मूल्य चुकाना पड़ेगा यह शायद लोगों ने नहीं सोचा था।
खरीदकर पीना पड़ रहा पानी
पहले जमाने में ग्रामीण कहते थे कि पानी से पतला कुछ नहीं होता। अब वही पानी लोगों को खरीदकर पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। मध्यम वर्गीय ज्यादातर परिवारों ने घर में आरओ सिस्टम लगवा लिए हैं, लेकिन जो इसका खर्च वहन नहीं कर पाते वह रोजाना 15 से 20 रुपये का कैंपर खरीदकर गला तर कर रहे हैं।
टीडीएस की मात्रा अब कई गुना
आरओ मैकेनिक नीरज की माने तो राई गांव में टीडीएस का स्तर 1400 से 2200 तक है। वहीं कुंडली में यह 1600 से 3300 तक है। यह खतरनाक श्रेणी में हैं। शुद्ध पेयजल में टीडीएस 90 से 100 तक ही होना चाहिए।
कुंडली में हरे रंग का पानी हो रही आपूर्ति
कुंडली निवासी प्रदीप खत्री कहते हैं कि गांव के आधे हिस्से में हरे रंग का पानी आपूर्ति होता है। यह पानी मनुष्य के लिए पीना तो दूर पशुओं को पिलाने लायक भी नहीं है। इसे जरूरतमंद परिवार के लोग कपड़े धोने या पशुओं को नहलाने में ही प्रयोग करते हैं।
फोटो :33: सोनीपत के कुंडली में आपूर्ति में आया हरे रंग का पानी। संवाद- फोटो : गुनगुनी धूप में पार्क में मस्ती करते बच्चे।
फोटो :33: सोनीपत के कुंडली में आपूर्ति में आया हरे रंग का पानी। संवाद- फोटो : गुनगुनी धूप में पार्क में मस्ती करते बच्चे।