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Sonipat News: डीसीआरयूएसटी में ईसी नामांकन का पुराना आदेश निरस्त, नए सदस्य चुनने के निर्देश

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सोनीपत। दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी) मुरथल की एग्जीक्यूटिव काउंसिल (ईसी) में नए सदस्यों के नामांकन का रास्ता साफ हो गया है। राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने डीन और प्रोफेसरों के नामांकन संबंधी 27 फरवरी 2025 के कार्यालय आदेश को निरस्त कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन को ईसी की रिक्तियां स्थापित रोटेशन और वरिष्ठता के आधार पर 15 दिन में भरने के निर्देश दिए गए हैं।
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राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी आदेश में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 21 और 27 अगस्त 2025 के निर्णयों तथा 7 अगस्त 2026 को हुई व्यक्तिगत सुनवाई के बाद उपलब्ध तथ्यों पर विचार किए जाने का उल्लेख है। आदेश के अनुसार कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 31 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए 27 फरवरी 2025 का आदेश निरस्त किया है। साथ ही भविष्य में नियुक्तियों और नामांकनों में विश्वविद्यालय अधिनियम व संबंधित स्टैच्यूट्स के प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
दीनबंधु छोटूराम विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डीक्रूटा) के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने बताया कि संघ ने डीन और प्रोफेसरों के नामांकन को लेकर राज्यपाल को कई स्तरों पर ज्ञापन दिए थे। संघ ने 27 फरवरी 2025 के आदेश पर आपत्ति जताते हुए विश्वविद्यालय अधिनियम और संबंधित स्टैच्यूट्स के अनुसार नामांकन करने की मांग की थी।
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संघ के अनुसार ईसी में डीन के तीन पदों पर विभिन्न संकायों के डीन का नामांकन निर्धारित रोटेशन के आधार पर किया जाना चाहिए। संघ का आरोप है कि 2025 के आदेश में कुछ संकायों के डीन को दोबारा नामांकित किया गया, जबकि अन्य संकायों की बारी बाकी थी। इसी तरह संघ ने दो प्रोफेसरों के नामांकन में वरिष्ठता और रोटेशन के प्रावधानों का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाया था।
संघ ने फैकल्टी ऑफ आर्किटेक्चर, अर्बन एंड टाउन प्लानिंग, फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज और फैकल्टी ऑफ एजुकेशन के डीन के नामांकन पर आपत्ति जताई थी। साथ ही फैकल्टी ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड कंप्यूटर साइंस, फैकल्टी ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज समेत अन्य संकायों की बारी पर विचार करने की मांग की थी।
संघ ने प्रोफेसरों के नामांकन में वरिष्ठता का उठाया था मुद्दा
संघ ने प्रोफेसरों के नामांकन में वरिष्ठता का मुद्दा भी उठाया था। संघ की ओर से उपलब्ध कराई गई 2 नवंबर 2017 की इंटर-से-सिनियरिटी सूची के अनुसार प्रो. मनोज दुहन, प्रो. सुधीर बत्रा और प्रो. अशोक कुमार शर्मा क्रमश: 22वें, 23वें और 24वें स्थान पर थे। संघ का आरोप था कि 27 फरवरी 2025 के आदेश में प्रो. अशोक कुमार शर्मा को ईसी सदस्य नामांकित किया गया, जबकि वरिष्ठता क्रम में प्रो. सुधीर बत्रा की बारी पहले बनती थी।
15 सितंबर 2026 को राज्यपाल सचिवालय ने भेजा निर्णय
नामांकन को लेकर विवाद हाईकोर्ट तक पहुंचा। संघ के अनुसार 27 अगस्त 2025 के हाईकोर्ट आदेश में राज्यपाल से मामले में उचित निर्णय लेने का अनुरोध किया गया था। इसके बाद 7 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत सुनवाई हुई और 15 सितंबर 2026 को राज्यपाल सचिवालय ने अपना निर्णय विश्वविद्यालय को भेज दिया।
देर रात तक कुलपति नहीं मिला जवाब
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह से मामले में पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन पर संपर्क नहीं हो सका। मैसेज के माध्यम से भी प्रतिक्रिया मांगी गई, लेकिन देर रात तक जवाब नहीं मिला।
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