जिला परिषद की मीटिंग में अधिकतर विभागों अधिकारियों के न पहुंचने पर जिप सदस्यों ने हंगामा कर दिया। उन्होंने ऐलान कर दिया कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण प्रभावित हो रहे विकास कार्यों के बारे में सीएम को बताया जाएगा। साथ ही उसी समय सीएम को सभी जिला परिषद सदस्य अपना इस्तीफा सौंपकर सदन को भंग करा देंगे। पार्षदों ने आरोप लगाया कि अधिकारी न अपने कार्यालय में पार्षदों की बात सुनते हैं और न ही कभी मीटिंग में आते हैं। विकास कार्य पूरी तरह से ठप पड़े हैं और इस हालात में पार्षद बने रहकर कोई फायदा नहीं है। पार्षदों के लगातार हंगामा करते देखकर सीईओ ने उनको किसी तरह शांत कराया और मीटिंग की खानापूर्ति की गई। वहीं, सीईओ ने सभी विभागों के अधिकारियों को इस बारे में पत्र जारी करने के साथ ही फोन पर बात करने का आश्वासन पार्षदों को दिया है।
जरूरी विभागों के अधिकारी अनुपस्थित
जिला परिषद सदस्यों की आखिरी मीटिंग जनवरी में हुई थी। उसके बाद किसी तरह एजेंडा तैयार करके पार्षदों को मीटिंग के लिए बुलाया गया था। जिला परिषद कार्यालय में चेयरपर्सन मीना नरवाल, वाइस चेयरमैन बिजेंद्र मलिक समेत 15 से ज्यादा पार्षदों के अलावा सीईओ, डिप्टी सीईओ पहुंच गए। वहां कुछ विभागों से ब्लाक स्तर के अधिकारी मीटिंग में पहुंच गए, जबकि बिजली, पब्लिक हेल्थ, सिंचाई, समाज कल्याण विभाग, खेल विभाग, एचएसआईआईडीसी, बैंक आदि जरूरी विभागों से कोई अधिकारी नहीं पहुंचा।
समस्याओं पर चर्चा, सुनने वाला कोई नहीं
मीटिंग की कार्रवाई शुरू हुई और पार्षदों ने अपने वार्डों की समस्याओं को रखना शुरू किया। समस्या के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को देखा गया, लेकिन वहां अधिकतर विभागों के अधिकारी नहीं मिले तो पार्षदों का गुस्सा भड़क गया। पार्षदों ने आरोप लगाया कि वह अधिकारियों के पास उनके कार्यालयों में समस्या लेकर जाते हैं तो वहां उनकी बात तक नहीं सुनी जाती है और अधिकारी कभी मीटिंग में भी नहीं आते है। इससे गुस्साए पार्षदों ने सीएम से जल्द मिलकर अधिकारियों की शिकायत करने के साथ ही सामूहिक रूप से अपना इस्तीफा सौंपने की बात कही। इसको लेकर ही वहां हंगामा शुरू हो गया। पार्षदों ने यह भी आरोप लगाया कि जिला परिषद की किसी भी मीटिंग में एक साल होने के बावजूद कोई भी अधिकारी नहीं आया है। उनके कारण ही विकास कार्यों पर असर पड़ रहा है और अधिकतर विकास कार्य शुरू नहीं हुए है तो काफी अधूरे पड़े हुए है। इस तरह काफी देर तक हंगामा चलता रहा तो सीईओ इंद्रजीत ने पार्षदों को आश्वासन दिया कि वह सभी अधिकारियों को पत्र लिखेंगे और उनसे फोन पर भी बात करेंगे।
कार्यों की प्रगति रिपोर्ट मांगी
उसके बाद मीटिंग का एजेंडा पढ़ा गया, जिसमें जिला परिषद कार्यालय के खर्च को पास करने का प्रस्ताव पास हुआ। इसके अलावा पहले जारी हुए तीन करोड़ रुपये के कामों की प्रगति रिपोर्ट मांगी गई और उसके बाकी कामों को जल्द पूरा कराने के लिए कहा गया।
पार्षद का आरोप, नहीं रुक रहा अवैध खनन
पार्षद नंदकिशोर चौहान ने कहा कि वह कई बार अधिकारियों को यमुना में अवैध रेत खनन की शिकायत कर चुके है। खुर्मपुर के पास यमुना में माफिया रोजाना खनन करते हैं, जिससे वहां 15 फुट गहरे गड्ढे बन गए हैं। इसके लिए अधिकारी मौके का निरीक्षण भी कर चुके हैं, लेकिन खनन माफियाओं पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। हालात यह हो चुके हैं कि अधिकारी केवल अपने स्वार्थ वाले काम कर रहे हैं और आम जनता की बात तक नहीं सुनते हैं। पार्षद ने बीसवां मील से मनौली तक की सड़क केजीपी निर्माण के कारण टूटने की समस्या रखी, जिसे जल्द बनवाया जाए। अटेरना से सेरसा तक रोड पर ड्रेन के पास रास्ता कच्चा है, उसे भी शुरू कराने की मांग रखी गई तो भैरा बांकीपुर से सेरसा रोड तक के रास्ते को उखाड़ने के बाद भी नहीं बनाया गया। उसे भी बनाने की मांग की गई है।
मोबाइल टावर कंपनियों को बंद कराया जाएगा
जिला परिषद क्षेत्र में लगे टेलीकॉम कंपनियों के मोबाइल टावर का टैक्स विभाग में नहीं जमा कराया जा रहा है। इसके अलावा लाइसेंस हर साल रिन्यू भी नहीं कराया जा रहा है। इस तरह जिला परिषद को नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसके लिए सभी टावरों की कंपनियों को नोटिस भेजा जाएगा और वह फीस जमा नहीं कराते हैं तो उनको बंद करा दिया जाएगा। इस पर तुरंत ही काम शुरू कराने के आदेश दिए गए हैं।
स्कूल में नहीं बिजली, ठेकेदार गली नहीं बना रहा
बड़ौली गांव में किसी कारण से निगम ने बिजली का कनेक्शन कटवा दिया, जिससे वहां बच्चे गर्मी में पढ़ते हैं। पानी की समस्या भी बनी हुई है। वहीं, गुहणा गांव में एक गली का टेंडर छोड़ा गया था, जिसे 10 लाख से बनाया जाना था, लेकिन ठेकेदार ने काम शुरू नहीं किया। इससे उसका ठेका निरस्त करने के आदेश भी दिए गए हैं। वहीं, गुहणा गांव में बुजुर्गों की पेंशन नहीं बनने का मुद्दा भी मीटिंग में उठाया गया।
गन्नौर बीडीपीओ के खिलाफ हंगामा
जिला परिषद की मीटिंग में कई पार्षदों ने गन्नौर बीडीपीओ के खिलाफ भी हंगामा किया। उनका आरोप है कि वहां कोई भी विकास कार्य सही से नहीं कराया गया है और बीडीपीओ उनका फोन तक नहीं उठाती है। बीडीपीओ मीटिंग में नहीं पहुंची थी, जिससे उनको तुरंत फोन कराकर बुलवाया गया। उन्होंने बताया कि वह दूसरी मीटिंग में गईं थीं, जिसके खत्म होते ही वहां पहुंच गईं। उन्होंने पार्षदों को आश्वासन दिया कि सभी समस्याओं को दूर किया जाएगा।