संवाद न्यूज एजेसी
सोनीपत। राजकीय स्कूलों में विद्यार्थियों को दिए जाने वाले मिड-डे मील में अब अध्यापकों को खाने की गुणवत्ता सुनिश्चित करनी होगी। इसके लिए हर माह मिड-डे मील के खाने की संबंधित लैब में जांच करवानी होगी। इसके लिए विद्यालय शिक्षा निदेशालय के निदेशक ने जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। मिड-डे मील खाने के टेस्ट करवाने के लिए सरकार ने मान्यता प्राप्त लैब की सूची जारी की है। स्कूलों को इन्हीं लैब में जांच करवाकर अपनी रिपोर्ट मुख्यालय भेजनी होगी।
राजकीय स्कूलों में विद्यार्थियों को दिए जाने वाले मिड-डे मील में पौष्टिक आहार शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर पोषण मिल सके। हालांकि स्कूलों में दिए जा रहे मिड-डे मील के खाने की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लग रहे हैं। इसे देखते हुए मौलिक शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मिड-डे मील में परोसे जा रहे खाने की निर्धारित लैब में प्रति माह जांच करवानी होगी, ताकि गुणवत्ता को लेकर लगातार मिल रहीं शिकायतों पर विराम लगाया जा सके।
जांच नहीं करवाने पर होगी कार्रवाई
शिक्षा विभाग ने स्कूलों के मिड-डे मील राशन की जांच करवाने की जिम्मेदारी मिड-डे मील प्रभारी को सौंपी है। उन्हें महीने में कम से कम एक बार मिड-डे मील जांच निर्धारित लैब में करवाना अनिवार्य रहेगा। निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि जो भी मिड-डे मील प्रभारी नियमों की अवहेलना करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। लैब में की जाने वाली टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर ही खाने में पोषक तत्वों के गुणवत्ता के तत्वों को सुनिश्चित किया जाएगा। अगर खाने की गुणवत्ता में कमी मिलती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ऑन द स्पॉट की जाए जांच : बड़वासनिया
जिला पार्षद संजय बड़वासनिया ने शिक्षा विभाग की इस योजना के खिलाफ रोष प्रकट किया। उन्होंने कहा कि टेस्ट की प्रक्रिया के चलते शिक्षकाें का अतिरिक्त कार्यभार बढ़ेगा। उन्होंने मांग की है कि मिड-डे मील के खाने की जांच ऑन दा स्पॉट ही होनी चाहिए। लैब या फिर शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर खाने की जांच करें, जिससे खाने की गुणवत्ता का सही मायने में पता चल पाए।
वर्जन
राजकीय स्कूलों में विद्यार्थियों को परोसे जाने वाले मिड-डे मील के खाने की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लैब में जांच करवानी अनिवार्य है। मिड-डे मील प्रभारी को हर माह खाने की एक बार लैब में जांच करवानी होगी। नियमों की अवहेलना करने पर प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- महाबीर सिंह, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, सोनीपत।