फोटो 21: सोनीपत के राई स्थित राजीव गांधी एजुकेशन सिटी में सुबह के समय छाया स्मॉग। संवाद
सोनीपत। राई क्षेत्र में पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के प्रतिबंध के बाद भी कूड़े का निस्तारण जलाकर किया जा रहा है। एक तरफ तो प्रदूषण रोकने के लिए निर्माण कार्य तक के लिए अनुमति लेनी पड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ कूड़ा सरेआम जलाया जा रहा है।
दिल्ली एनसीआर में शामिल सोनीपत जिले में बढऩे प्रदूषण को रोकने के लिए एनजीटी ने कूड़ा जलाने पर रोक लगा रखी है। निर्माण कार्यों के लिए अनुमति लेने के आदेश दिए हैं और बड़ी क्षमता के जनरेटर चलाने पर भी आगामी आदेशों तक प्रतिबंध है। इसके बावजूद राई क्षेत्र में असावरपुर के पास सरेआम कूड़ा जलाया जा रहा है। एनजीटी ने प्रदूषण रोकने के लिए आदेश जारी किए थे कि कूड़ा जलाते मिलने पर पांच हजार रुपये तक जुर्माना वसूला जाए। खुले में सामग्री डालने और मलबा डालने वालों से जुर्माना वसूला जाए, लेकिन उसके बाद भी नियमों का पालन नहीं हो रहा है।
गावं असावरपुर निवासी दिनेश व राजेंद्र का कहना है कि एनजीटी ने जिले में कूड़ा जलाए जाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। बावजूद इसके आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। गांव के कूड़ा डालकर जलाया जा रहा है। बुजुर्ग लोगों को सांस लेने तक में दिक्कत आती है। इसके बावजूद प्रशासन व सरकार की तरफ से ठोस पहल नहीं हो रही है। केमिकल युक्त सामान व रबड़ तक डालकर जला दी जाती है।
प्रदूषण का स्तर खराब श्रेणी में बना हुआ
सोनीपत में प्रदूषण का स्तर खराब श्रेणी में बना हुआ है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 256 दर्ज किया गया है। हालांकि मुरथल में लगाया गया मॉनीटरिंग सिस्टम भी दो दिन से बंद पड़ा है।
कूड़ा जलाने वालों के साथ ही प्रदूषण फैलाने वालों पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है। राई क्षेत्र में कूड़ा जलाया जा रहा है तो वहां भी निरीक्षण कराकर ठोस कार्रवाई की जाएगी। प्रदूषण फैलाने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा।
- प्रदीप सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।