सोनीपत। नवजात शिशु के पोषण के लिए व बेहतर देखभाल के प्रति जागरूक करने के लिए सोमवार से नवजात शिशु सुरक्षा सप्ताह की शुरुआत हो रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से माताओं व गर्भवती महिलाओं को उनके बच्चे की सुरक्षा व बेहतर देखभाल को लेकर जागरूक किया जाएगा।
बताया जाएगा कि छह माह तक नवजात को सिर्फ स्तनपान कराए। बच्चे की सेहत के लिए मां के दूध पौष्टिक होता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में एक साल में 25 हजार बच्चे जन्म लेते हैं। जिले में शिशु मृत्यु दर 19 फीसदी है। इस दर को और कम करने के लिए विभाग की ओर से समय-समय पर अभियान चलाए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि सितंबर से दिसंबर के बीच में सबसे ज्यादा बच्चे पैदा होते हैं। इस दौरान नवजात शिशुओं के माता-पिता को शिशुओं की देखभाल व उनकी जानलेवा बीमारियों से बचाव के बारे में जानकारी दी जाती है। शिशुओं के उत्तम स्वास्थ्य के लिए बेहतर देखभाल की जाती है। खासकर शुरुआत के एक सप्ताह तक बेहतर देखभाल के लिए जागरूक किया जाता है।
मृत्यु दर कम करने के लिए सांस अभियान चल रहा
स्वास्थ्य विभाग की ओर से 12 नवंबर से ही सांस अभियान की शुरुआत की गई है। यह अभियान 28 फरवरी 2026 तक चलेगा। सर्दी के दौरान हर साल करीब 16 फीसदी 0-5 वर्ष तक के बच्चे प्रति वर्ष निमोनिया से संक्रमित हो जाते हैं। समय पर उपचार कराने पर जन्म से लेकर पांच वर्ष तक बच्चों की होने वाली मृत्यु में निमोनिया मुख्य कारण हो जाता है। 28 फरवरी तक चलने वाले सांस अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ता व एएनएम की ओर से बीमार बच्चे को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से दवा दिलाई जाएगी।
शिशु व मातृ की देखभाल के लिए यह है जरूरी
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि बच्चे के जन्म के पास शिशु व मातृ को 25 से 27 डिग्री तापमान में रखना होता है। अगर बच्चा गर्भ के 37 सप्ताह से पहले हो जाए या उसका वजन 2.5 किलोग्राम से वजन है तो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।
17 नवंबर से नवजात शिशु सुरक्षा सप्ताह की शुरुआत होने जा रही है। लोगों से अपील की गई कि वह जन्म से लेकर पांच वर्ष तक के बच्चों के अभिभावक सर्दी के मौसम में अपने बच्चों का विशेष ध्यान रखें।
- डॉ. ज्योत्सना, सिविल सर्जन