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Sonipat News: उधार के जूतों और स्टिक के साथ मैदान में उतर अंतरराष्ट्रीय फलक पर छाईं नेहा

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नेहा गोयल, हॉकी खिलाड़ी। - फोटो : Sonipat
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सोनीपत। भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी नेहा गोयल ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कुछ अलग करने का सपना देखा। पारिवारिक स्थितियां भी प्रतिकूल थीं, लेकिन जिद थी अपनी मंजिल प्राप्त करने की। पर हिम्मत नहीं हारी, शांत रहकर मुकाबला किया और मुकाम को हासिल कर अंतरराष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान बनाई। सोनीपत के वेस्ट रामनगर की इस लाडली ने युवाओं के लिए नजीर पेश की है।
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भारतीय महिला हॉकी टीम की सदस्य नेहा गोयल सोनीपत के वेस्ट राम नगर में अपनी मां के साथ रहती हैं। पहले नेहा गोयल किराए के मकान में रहती थी, लेकिन अब खुद के मकान के साथ ही एक फ्लैट भी उनके पास हैं। नेहा गोयल के संघर्ष की हर तरफ प्रेरणा दी जाती हैं। नेहा के पास कभी पहनने के लिए जूते तक नहीं थे। नेहा की मां ने मजदूरी कर अपने परिवार को संभाला। पिता शराब पीते थे, जिनकी कई वर्ष पहले मौत हो गई थी। वर्ष 2006 में करीब नौ साल की दुबली पतली और छोटे कद की एक लड़की प्रतिदिन एचएसआईआईडीसी के हॉकी ग्राउंड के नजदीक से गुजरती। महिला खिलाड़ियों को रंग बिरंगी ड्रेस में अभ्यास करते हुए देखतीं। नेहा का भी मन करता कि वह भी रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर उनके बीच हॉकी खेले, लेकिन परिस्थितियां बाधा बनी हुई थी। हॉकी खेलने का जुनून मन के अंदर ही हिलोरे मारकर रह जाता।
कोच प्रीतम सिवाच की नजर पड़ी और बदल गई जिंदगी
कुछ दिन दूर से देखने के बाद नेहा एक दिन हॉकी मैदान में करीब जाकर हॉकी खिलाड़ियों को अभ्यास करते देख रही थी, तभी कोच प्रीतम सिवाच की नजर उस मासूम लड़की पर पड़ी। वहीं से नेहा की किस्मत पलट गई। प्रीतम सिवाच ने उससे पूछा क्या देख रही है ? तब उसने कहा कि उसे भी हॉकी पंसद है, लेकिन उसके बाद संसाधन नहीं हैं। यहां तक कि जूते भी नहीं है। प्रीतम ने कहा कि उसकी चिंता मत कर, अगर मेहनत कर सकती है तो मैदान में जाओ। आंखों में सतरंगी सपनों के साथ मैदान में दाखिल हुई नेहा ने फिर हॉकी ग्राउंड को जीवन की मंजिल बनाया। इस दौरान पढ़ाई की चिंता हुई तो उसका दाखिला टीकाराम स्कूल में करवाया गया। घर की आर्थिक तंगी जारी थी, मां मजबूरी में मजदूरी करती थी, लेकिन उसने नेहा को कभी खेलने से मना नहीं किया बल्कि हमेशा उसका हौसला बढ़ाया। नतीजा यह रहा कि नेहा ने परिणाम देने शुरू किए। पहले राष्ट्रीय चैंपियनशिप में देश की सबसे प्रतिभावान खिलाड़ी बनी तो फिर दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी प्रतिभावान खिलाड़ी का अवार्ड जीता। ग्लास्गो में होने वाले एफआईएच चैंपियंस चैलेंज में खेली और सैफ गेम्स के लिए भारतीय टीम का हिस्सा रही। भारतीय टीम के साथ ओलंपिक तक का सफर करने वाली नेहा आज किसी पहचान की मोहताज नहीं। हरियाणा की ओर से खेल रही नेहा की प्रतिभा के लोग कायल हो गए हैं। उनका लक्ष्य महिला हॉकी में देश को ओलंपिक में पदक दिलाना है। इसके लिए वह जी तोड़ मेहनत कर रही हैं।
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प्रीतम सिवाच को रोल मॉडल मानती है नेहा
नेहा ने साल 2006 में उधार के जूतों और स्टिक के साथ हॉकी में अपने करियर की शुरुआत की। तीन बहनों में सबसे छोटी नेहा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर चुकीरु। जूनियर राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिता में स्वर्ण, सीनियर राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिता में रजत, बैंकाक में आयोजित जूनियर एशिया कप में कांस्य जीत चुकी है। टीवी पर राष्ट्रीय महिला हॉकी खिलाड़ियों को देखकर उनसे हॉकी की प्रेरणा लेने वाली नेहा गोयल प्रीतम सिवाच को अपना रोल मॉडल मानती है।
आर्थिक तंगी को नहीं बनने दिया रोड़ा
अपना सपना पूरा करने के लिए नेहा ने कड़ी मेहनत की है। फटे जूते पहनकर वह नौ साल पहले प्रीतम सिवाच के पास पहुंची थीं। प्रीतम सिवाच ने उसे अपना सानिध्य दिया और उसे तराशने में मदद की। उसका फल अब उसे मिलने लगा है। नेहा की मां सावित्री कहती हैं कि उसकी लगन और मेहनत है जो वह यहां तक पहुंची है। तीन बेटियों की परवरिश करना आसान नहीं था। नेहा ने अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति और कड़ी मेहनत से आर्थिक तंगी को कभी आड़े नहीं आने दिया। कभी फटे जूतों के साथ मैदान में पहुंची यह खिलाड़ी आज आसमान का चमकता सितारा है।
हॉकी टेस्ट सीरिज की कर रहीं तैयारी
नेहा गोयल वर्तमान में हॉकी टेस्ट सीरिज की तैयारी कर रही है। सीरिज का आयोजन दक्षिण अफ्रीका में होना है। इसके लिए वह साई सेंटर बंगलूरू में रहकर कड़ा अभ्यास कर रही है। उनकी टीम ने पिछले दिनों स्पेन में आयोजित एफआईएच हॉकी में खिताबी जीत दर्ज की है। उनके हौसले बुलंद हैं।
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