घटती सहनशीलता और रिश्तों में आ रही गिरावट के कारण अपने ही अपनों के खून के प्यासे बन रहे हैं। मामूली बात पर आपा खो रहे लोग अपनों का कत्ल करने से भी पीछे नहीं हटते। गांव बनवासा की घटना भी लोगों को झकझोर देने वाली है। जिस मां-बाप ने लालन-पालन कर पवन को बड़ा किया उन्होंने ही धारदार हथियारों से जवान बेटे की जान ले ली। बताया गया है कि वह शराब पीकर झगड़ा करता था। जिसमें उसकी हत्या कर दी गई।
गांव बनवासा निवासी पवन (30) अपने माता-पिता की छोटी संतान था। वह अभी तक अविवाहित ही था। बड़े भाई की शादी हुई और बच्चे होने के बाद वह अपने माता-पिता व भाई से अलग रहने लगा। पवन के पास कोई रोजगार नहीं था। पिता खेती-बाड़ी करते थे। जिसमें वह हाथ बंटाता था। बताया गया है कि अब वह शराब पीने लगा था। शराब के नशे में ही माता-पिता से झगड़ा करने लगा। घर में अक्सर कलह रहती थी। इसी कलह में पवन की जान चली गई।
बड़े बेटे से कहा जो करना था कर दिया
पवन के बड़े भाई प्रवीण ने पुलिस को बताया है कि घर से शोर सुनकर उसने पवन का दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया था। दरवाजा नहीं खुलने पर छत के रास्ते घर में पहुंचा। वहां भाई लहूलुहान पड़ा था। उसके माता-पिता ने इतना ही कहा कि जो करना था कर दिया। उसके बाद वह भाई की जिंदगी बचाने के लिए उसे अस्पताल में ले गया था, लेकिन आखिर उसकी मौत हो गई।
झाड-फूंक करने वाले के पास जाती थी युवक की मां
बताया जा रहा है कि बेटा अक्सर घर में कलह रखने लगा तो उसकी मां ने घर का कलह मिटाने के लिए झाड़-फूंक करने वाले के पास जाना शुरू कर दिया था। उसके बावजूद घर की कलह खत्म नहीं हो सकी। आखिर में माता-पिता ने बेटे का खून ही बहा दिया।
बदलती जीवन शैली जिम्मेदार
जीवीएम कॉलेज की मनोविज्ञान विभाग की प्रोफेसर जेसमीन कहती है कि वर्तमान में बदलती जीवन शैली का असर तेजी से दिख रहा है। गुस्से में लोग आपा खो बैठते हैं और बड़ी वारदात को अंजाम दे देते हैं। मां-बाप को अपने बच्चों पर विशेष नजर रखनी चाहिए। अगर वह गलत रास्ते पर जाने लगे तो उसे समय पर समझाकर सही रास्ते पर लाया जा सके। किसी की जान लेना किसी भी तरीके से सही नहीं है। अगर बच्चे गलत रास्ते पर आगे बढ़ चुके है तो उन्हें घर से बाहर करने का भय दिखाकर सही रास्ते पर लाने का प्रयास करना चाहिए।