शारदीय नवरात्र
हाथी पर सवार होकर आएंगी मां, बनेंगे तीन शुभ संयोग
हस्त नक्षत्र, शुक्ल ब्रह्म योग व व्रज योग में मनाए जाएंगे नवरात्र, भक्तों के लिए रहेंगे शुभ
माता का हाथी पर सवार होकर आना और जाना समृद्धि का प्रतीक
कलश स्थापना के साथ आज से नवरात्र शुरू, पहले दिन होगी मां शैलपुत्री की पूजा
फोटो 16- नवरात्र के उपलक्ष्य में चिटाने वाली माता मंदिर में सजावट करते हुए। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। मां दुर्गा की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र आज यानी सोमवार से शुरू हो रहे हैं, जो 5 अक्तूबर को विजयादशमी पर समाप्त होंगे। नवरात्र में तीन अद्भुत संयोग हस्त नक्षत्र, शुक्ल ब्रह्म योग व व्रज योग बन रहे हैं। जिसे पूजा-पाठ के लिए बहुत शुभ माना गया है।
चिटाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शोनक ने बताया कि इस बार नवरात्र सोमवार के दिन शुरू होने से माता हाथी पर सवार होकर पृथ्वी पर आएंगी और हाथी पर ही जाएंगी। जिसे लोगों के लिए शुभ माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि पर देवी के अलग-अलग वाहनों पर आना शुभ व अशुभ दोनों तरह के फल के संकेत होते हैं। इस बार माता का आगमन और विदाई दोनों ही हाथी पर होगी। यह शुभ संकेत हैं। शास्त्रों में हाथी को बुद्धि, ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। माता का हाथी पर आगमन देश में समृद्धि लेकर आएगा तथा लोगों को ज्ञान की प्राप्ति होगी। नवरात्र में 29 व 30 सितंबर को दो दिन सर्वार्थ सिद्धि योग की साक्षी रहेगी। इस योग में की गई साधना विशेष फल प्रदान करती है। पंचांग गणना के अनुसार यह 29 सितंबर को मध्यरात्रि में शुरू होगा, जो अगले दिन 30 सितंबर को रात्रि पर्यंत रहेगा। इस दृष्टि से 26 घंटे का यह महासंयोग मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए बेहद खास है।
उन्होंने बताया कि इसके बाद महा अष्टमी का व्रत-पूजन तीन अक्तूबर को होगा। महानवमी तिथि का मान चार अक्तूबर मंगलवार को होगा। नवमी तिथि दिन के 01.32 बजे तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि शुरू होगी।
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कलश स्थापना का यह रहेगा शुभ मुहूर्त
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त : सुबह 6:11 से 7:51 बजे तक अमृत चौघड़िया
दूसरा शुभ मुहूर्त : सुबह 9:13 बजे से 10:43 बजे तक शुभ चौघड़िया
अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:58 बजे से दोपहर 01:04 बजे तक
अष्टमी-नवमी को संधि पूजा का मुहूर्त : दोपहर 3:36 बजे शाम 4:24 बजे तक
शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि : 26 सितंबर को सुबह 3:24 बजे से 27 सितंबर तड़के 3:08 बजे तक।
शुक्ल योग : 26 सितंबर को सुबह 8.06 बजे तक रहेगा।
ब्रह्म योग : 26 सितंबर को सुबह 8.06 बजे से 27 सितंबर सुबह 6.44 तक रहेगा।
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कलश स्थापना विधि
-पहले नवरात्र पर शुभ मुहूर्त में घट स्थापना कर मां शैलपुत्री का पूजन किया जाएगा।
-सुबह उठकर जल्दी स्नान कर लें, फिर पूजा के स्थान पर गंगाजल डालकर उसकी शुद्धि कर लें।
-घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
-मां दुर्गा का गंगाजल से अभिषेक करें।
-मां को अक्षत, सिंदूर और लाल पुष्प अर्पित करें, प्रसाद के रूप में फल और मिठाई चढ़ाएं।
-धूप और दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और फिर मां की आरती करें।
-मां को भोग लगाएं।
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शारदीय नवरात्रि की तिथियां
तिथि पूजन
26 सितंबर : मां शैलपुत्री
27 सितंबर : मां ब्रह्मचारिणी
28 सितंबर : मां चंद्रघंटा
29 सितंबर : मां कुष्मांडा
30 सितंबर : मां स्कंदमाता
01 अक्तूबर : मां कात्यायनी
02 अक्तूबर : मां कालरात्रि
03 अक्तूबर : मां महागौरी
04 अक्तूबर : मां सिद्धिदात्री
05 अक्तूबर : नवरात्रि दुर्गा विसर्जन, विजयादशमी एवं दशहरा