झज्जर। जिला लोक संपर्क एवं परिवेदना समिति की संवाद भवन में हुई बैठक में कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा के नहीं आने के कारण डीसी स्वप्निल रविंद्र पाटिल ने सुनवाई की। इस दौरान झज्जर निवासी विक्की ने कहा कि कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत माता संतोष की सेवा के दौरान निधन हो गया। छह साल से सिविल सर्जन कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। अबतक न नौकरी मिली और न ही किसी तरह की आर्थिक सहायता।
विक्की ने बताया कि मां के निधन के बाद सरकार ने कोरोना वॉरियर्स का दर्जा दिया लेकिन कोरोना वॉरियर्स को मिलने वाली राशि आज तक नहीं मिली। एचआरए का लाभ भी मिला। डीसी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से जवाब मांगा। अधिकारियों ने बताया कि शिकायतकर्ता को पीएम गरीब कल्याण योजना के तहत 50 लाख रुपये की राशि मिल चुकी है।
सरकार की पॉलिसी है कि जिसे कहीं से भी सहायता राशि मिली है उसे 20 लाख रुपये से घटाकर बाकी राशि दी जाती है। यहां पहले ही 50 लाख दिए जा चुके हैं। एचआरए के लिए मार्गदर्शन मांगा गया है। महिला की उम्र ज्यादा थी, इसलिए नौकरी नहीं दी जा सकी। इस पर पीड़ित ने कहा कि सरकार के नियम में कहीं नहीं लिखा कि मुआवजा और नौकरी नहीं मिल सकती।
डीसी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह इन सभी बातों को लेकर मुख्यालय से मार्गदर्शन लें। इस केस को लंबित रखा गया। बैठक में 14 मामले रखे गए, जिसमें से 8 का निपटारा कर दिया जबकि 6 लंबित रखे गए।
बैठक में रोहद निवासी जितेंद्र ने गांव में लिए तालाब के पट्टे को नहीं बढ़ाने की शिकायत रखी। उन्होंने बताया कि यह तालाब 8 साल के लिए पट्टे पर लिया था। शर्तों में एक साल बढ़ाने के लिए बारे में लिखा था लेकिन इसे नहीं बढ़ाया गया। अधिकारियों ने कहा कि यह मामला कोर्ट में चल रहा है। एक साल से बिना पट्टे के शिकायतकर्ता उसका इस्तेमाल कर रहा है। उस पर एक लाख रुपये रिकवरी बनती है।
जितेंद्र ने दूसरी शिकायत गांव में ही एक अन्य तालाब पर अवैध रूप से मछली पालन करने की हुई थी। इन दोनों मामलों में डीसी ने एसडीएम बहादुरगढ़ को जांच करने के आदेश दिए। मांडौदी निवासी जगपति ने 2011 में किए प्लाट के सौदे के बावजूद कब्जा नहीं दिए जाने व दूसरे को बेचने की शिकायत रखी। इस पर डीसी व डीसीपी ने एसीपी हैडक्वार्टर झज्जर को दोनों पक्षों को बुलाकर जांच करने के आदेश दिए।
कृषि विभाग से सेवानिवृत्त एसडीओ ग्वालिसन निवासी वेदपाल धनखड़ ने गांव में कम्युनिटी सेंटर नहीं बनने सहित अन्य शिकायत रखी। उसका आरोप था कि प्लाॅट पर कब्जा कर लिया गया है। इस पर डीसी ने डीडीपीओ को डीआरओ कोर्ट में पैरवी कर मामले को निपटाने के निर्देश दिए।
बैठक में डीसीपी दीप्ति गर्ग, सीईओ जिला परिषद मनीष फौगाट, एसडीएम झज्जर रवि मीणा, एसडीएम बेरी रेणुका नांदल, एसडीएम बादली विशाल कुमार, सीटीएम रितु बंसीवाल, एसीपी अनिरुद्ध चौहान मौजूद रहे।
फर्जी तरीके से बस बेचने की शिकायत
बरहाना निवासी राजकुवार ने फर्जी तरीके से बस बेचने की शिकायत की। कहा कि उनको गलत तरीके से पद से हटाया गया और सूचना नहीं दी गई। उनकी सुनवाई नहीं हुई। उनकी समिति का रजिस्ट्रेशन 14 दिसंबर 1993 में किया गया था, जिसके वह संस्थापक सदस्य है। सदस्य होने के बावजूद समिति की तत्कालीन प्रबंध कमेटी ने लिए गए किसी निर्णय में उसे शामिल नहीं किया। उसने मांग की कि 1993 से लेकर 2005 तक जो लोग इस समिति में शामिल हुए, उनकी जांच में शामिल किया जाए। इस मामले में डीसी ने सुनवाई करते हुए जांच करने के निर्देश दिए।
पीड़ित बोले-चौपाल में सोना पड़ रहा, मुआवजा नहीं मिला
अच्छेज निवासी जयभगवान ने शिकायत की कि वह और उनकी पत्नी वृद्ध हो चुके हैं। 31 जुलाई 2025 की सुबह बारिश के कारण मकान की कड़ी टूटकर गिर गई थी। दूसरा कोई मकान नहीं है। आय के साधन नहीं है। मकान नहीं बनवा सकते। अब रात को चौपाल में सोना पड़ता है। गांव बामनौला निवासी गोविंद सिंह ने शिकायत दी कि गत दिनों बारिश से मकान की दीवारें दरक गईं। छत से पानी टपकता है। मकान में रहना बेहद मुश्किल हो गया है। दोनों ने मुआवजे की मांग की। इस पर अधिकारियों ने बताया कि दोनों केस बनाकर सरकार को भेजे हुए हैं।