अगर किसी के खिलाफ जांच चल रही हो और उसका जांच अधिकारी उसे ही बना दिया जाए तो क्या परिणाम होता है अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। इसी तरह का कारनामा हुआ है मुरथल स्थित दीनबंधु छोटूराम यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में। कुलपति के खिलाफ भेदभाव, परिवारवाद और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ ने सीएम विंडो पर शिकायत दी थी। इसकी जांच सरकार ने कुलपति को ही भेज दी। जबकि उन्हीं के खिलाफ शिकायत दी गई थी। कुलपति ने इस पर खुद ही रिपोर्ट तैयार करके प्रदेश के राज्यपाल कार्यालय को सौंप दी और अपने को निर्दोष करार दे दिया। जानकारी के अनुसार दीनबंधु छोटूराम यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, मुरथल के खिलाफ टीचिंग व नॉन टीचिंग स्टाफ ने अप्रैल 2016 में सीएम विंडो पर कुलपति राजपाल दहिया के खिलाफ सबूतों के साथ शिकायत दी थी। जिस पर इसकी जांच करने की बजाए शिकायत को जांच के लिए कुलपति प्रो.राजपाल दहिया को ही भेज दिया। इस पर दहिया ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश के राज्यपाल को भेज दी और खुद को निर्दोष साबित कर दिया।
क्या है यूनियन का आरोप
आरोप है कि कुलपति प्रो. राजपाल दहिया मनमानी कर रहे हैं। उन्होंने नियमों को तोड़कर न केवल अपना वेतन बढ़ा लिया, बल्कि अपनी रिश्तेदारों को भी गैरकानूनी ढंग से लाभ दिया है। जिसमें अपने रिश्तेदारों को सरकारी नियम ताक पर रखकर सी -51 मकान दे दिया यूनियन का आरोप था कि वह इसके लिए इनटाइटल ही नहीं है। इसी तरह के कुछ आरोप यूनियन ने कुलपति पर लगाए थे।
जांच के नाम पर हो रहा खिलवाड़
टीचिंग स्टाफ एसोसिएशन के प्रधान डॉ. अजय डबास व नॉन टीचिंग के प्रधान आनंद राणा का कहना है कि यह जांच के नाम पर खिलवाड़ हो रहा है इससे साफ जाहिर है सरकार की नियत में खोट है और सरकार भ्रष्टाचार रहित शासन देने का ढोंग कर रही है। अगर सरकार की नियत साफ होती, तो इसकी उच्च स्तरीय जांच कराती ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। यूनियन का कहना है कि वे जल्द ही सारे मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष लाऐंगे।
सारे आरोप बेबुनियाद
कुलपति प्रो. राजपाल दहिया का कहना है कि जितने भी आरोप उन पर लगाए गए हैं, वह सारे निराधार व गलत हैं। उन्होंने कहा कि पद पर रहते हुए उन्होंने किसी तरह की गड़बड़ी नहीं की है और वे सारी रिपोर्ट ऊपर दे चुके हैं।