नेशनल हाईवे पर बस में सवार होकर घर जाते प्रवासी मजदूर।
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सोनीपत। एक बार फिर कोरोना के कहर के बीच दिल्ली में लॉकडाउन के बाद प्रदेश में प्रवासी मजदूरों के अंदर डर पैदा हो गया है। जिस तरह से पिछले साल लॉकडाउन होने पर प्रवासी मजदूरों को घर जाने में परेशानी हुई थी, उसको देखते हुए पहले ही पलायन शुरू कर दिया है। जिससे नेशनल हाईवे पर प्रवासी मजदूरों की घर वापस जाने के लिए सुबह व शाम को लाइन लग जाती है। इससे उद्यमियों के लिए परेशानी भी खड़ी हो गई है और मजदूरों की कमी से फैक्टरियों में उत्पादन 30 प्रतिशत तक कम हो गया है।
कोरोना के कारण जब पिछले साल लॉकडाउन की घोषणा हुई तो यातायात अचानक बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी प्रवासी मजदूरों को झेलनी पड़ी थी। मजदूरों के लिए जब खाने की परेशानी हुई तो वह पैदल ही घर के लिए निकल गए थे और सैकड़ों किमी पैदल चलकर किसी तरह अपने घर पहुंचे थे। जिसके बाद फैक्टरी शुरू हुई तो मजदूर काफी मशक्कत के बाद वापस लौटे थे। उस तरह के हालात अब पैदा होने लगे है और कोरोना के कहर बरपाने के कारण अधिकतर राज्यों में लॉकडाउन शुरू हो गया है। दिल्ली के अंदर भी लॉकडाउन लग गया है और उसके डर से प्रवासी मजदूर लगातार पलायन करने में लगे है। यहां कुंडली, राई, नाथूपुर औद्योगिक क्षेत्र से करीब 10 हजार से ज्यादा मजदूर अभी तक पलायन कर चुके हैं। मजदूरों की नेशनल हाईवे पर सुबह दिन निकलने से पहले व शाम को दिन छुपने पर लाइन लग जाती है। क्योंकि वह प्राइवेट बसों में अपने घर जाते हैं, जिनमें कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ाकर उनको बैठाया जाता है और उनसे 2-2 हजार रुपये तक वसूली की जाती है। बिहार के अररिया के रहने वाले बिंदर व राजाराम ने बताया कि लॉकडाउन लगने लगा है और कोरोना भी कम नहीं हो रहा है। इसलिए पहले ही अपने घर जा रहे है, जिससे पिछले साल की तरह परेशान नहीं होना पड़े।
मजदूरों के पलायन से परेशान उद्यमी, फैक्टरियों में उत्पादन घटा
प्रवासी मजदूरों के पलायन से उद्यमियों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। क्योंकि पहले कोरोना के कारण फैक्टरी बंद रही तो उसके बाद किसान आंदोलन ने परेशानी बढ़ा दी। अब दोबारा से स्थिति सामान्य होती जा रही थी तो अब फिर से मजदूरों ने पलायन शुरू कर दिया। ऐसे में उद्यमियों के लिए मजदूरों का संकट खड़ा होता जा रहा है। कुंडली इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के प्रधान सुभाष गुप्ता ने बताया कि करीब दस हजार मजदूर यहां से चले गए हैं और फैक्टरियों पर उसका असर भी दिखने लगा है। यहां काफी फैक्टरी में 30 प्रतिशत तक उत्पादन कम हो गया है और यही हालात रहे तो स्थिति काफी खराब हो सकती है।
सरकार ने स्थिति को देखते हुए अभी लॉकडाउन नहीं लगने की बात कही है। इसलिए किसी को डरने की जरूरत नहीं है। इसलिए प्रवासी मजदूरों को वापस जाने की जगह काम करते रहना चाहिए। उनकी हर संभव मदद की जाएगी। - अशोक बंसल, एडीसी