सोनीपत। पौराणिक शहर सोनीपत विकास की नई गाथा लिख रहा है। पांडवों ने कौरवों से युद्ध न करने की एवज में जो पांच गांव मांगे थे, उनमें सोनीपत भी था। जिसे उस समय स्वर्णप्रस्थ कहा जाता था। सोनीपत को 22 दिसंबर, 1972 को रोहतक से अलग कर बनाया गया था। कभी साइकिल बनाने को विख्यात सोनीपत अब जल्द ही कार बनाने के लिए जाना जाएगा।
महानगर बनने की दिशा में बढ़ रहा सोनीपत अब कार बनाने जा रहा है। खरखौदा के औद्योगिक मॉडल टाउनशिप (आईएमटी) में स्थापित किया गया मारुति का प्लांट अगले साल से कारों का उत्पादन करने लगेगा। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल सोनीपत तरक्की में गुरुग्राम व फरीदाबाद से कभी काफी पीछे रह गया था। हालांकि अब सोनीपत विकास के सोपान पर आगे बढ़ चला है। मेट्रो प्रोजेक्ट जमीन पर उतर चुका है तो ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर मानेसर की ओर से सोनीपत की ओर तेजी से रफ्तार पकड़ रहा है। सोनीपत में एटलस कंपनी ने साइकिल बनाने को पहली यूनिट वर्ष 1951 में लगाई थी। पहले यहां 120 साइकिल रोजाना बनती थी और 1990 के दौर तक देश के साथ विदेश तक मांग हुई तो 40 लाख साइकिल सालाना बनने लगी थी। हालांकि वर्ष 2003 तक कंपनी ने अपना कारोबार यहां से शिफ्ट कर दिया।
मारुति हर साल बनाएगी 10 लाख कार
सोनीपत में मारुति कंपनी पहुंच गई है। कंपनी की चौथी कार यूनिट का निर्माण किया जा रहा है। इसमें वर्ष 2025 में कार बनाना शुरू कर दिया जाएगा। कंपनी के शुरू होने के बाद यहां हर साल 10 लाख कार बनेंगी। नए प्लांट के लिए पहले फेज में 11,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। कंपनी के पास सोनीपत में इतनी जमीन है कि भविष्य में वह यहां और प्लांट स्थापित कर सकती हैं।