राष्ट्रमंडल खेलों में पैरा पावर लिफ्टिंग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाले गांव लाठ निवासी सुधीर का वीरवार को वतन लौटने पर भव्य स्वागत किया गया। दिल्ली हवाई अड्डे से बाहर निकलने पर परिजनों व प्रशंसकों ने फूल मालाओं से उनका स्वागत किया। यहां से वे गांव के लिए रवाना हुए। बहालगढ़ चौक पर पहुंचने पर सुधीर के स्वागत में ग्रामीणों व प्रशंसकों की भीड़ उमड़ पड़ी। प्रशंसकों ने सुधीर को फूल मालाओं से लाद दिया और पुष्पवर्षा की। कई घंटे के स्वागत के बाद सुधीर को खुली जीप में बैठाकर गांव लाया गया। रास्ते में भी सुधीर के स्वागत में प्रशंसक बेसब्री से इंतजार करते मिले। बहालगढ़ से गांव तक सुधीर का जगह-जगह स्वागत किया गया। यही कारण रहा कि सुधीर को बहालगढ़ से गांव लाठ तक 40 किलोमीटर का सफर तय करने में पांच घंटे से अधिक का समय लग गया।
सात बार के राष्ट्रीय स्वर्ण पदक विजेता गांव लाठ निवासी सुधीर ने राष्ट्रमंडल खेलों में पैरा पावर लिफ्टिंग में स्वर्ण पदक जीत बर्मिंघम में तिरंगा लहराया था। सुधीर ने हैवीवेट कैटेगरी में दूसरे चरण में 212 किलोग्राम भारवर्ग उठाकर नया रिकार्ड कायम किया। उन्हें राष्ट्रमंडल खेलों में पैरा पावर लिफ्टिंग में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बनने का गौरव मिला। विदेश में देश का मान बढ़ाकर वीरवार को वतन लौटे सुधीर दिल्ली हवाई अड्डे से सुबह करीब 10:45 बजे बहालगढ़ पहुंचे। जहां ग्रामीणों व प्रशंसकों ने भव्य स्वागत किया। कई घंटे के स्वागत के बाद सुधीर को खुली जीप में बैठाकर गांव की तरफ रवाना हुए। सुधीर के स्वागत काफिले में कारों व बाइकों पर बड़ी संख्या में ग्रामीण जीप के पीछे चलते रहे। विदेश में देश व प्रदेश का मान बढ़ाकर लौटने पर जगह-जगह लाडले का जोरदार स्वागत किया गया।
लाठ-जौली चौक पर स्वागत को उमड़ी ग्रामीणों की भीड़
बहालगढ़ से चलकर काफिला शाम करीब साढ़े चार बजे लाठ-जौली चौक पर पहुंचा। जहां लाडले का स्वागत करने के लिए ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। वाहनों के लंबे काफिले के चलते गोहाना रोड पर जाम की स्थिति बनी रही। सुधीर सीधे गांव के मंदिर में पहुंचे। जहां ग्रामीणों ने शानदार स्वागत किया। ग्रामीणों द्वारा मंदिर में भंडारे के लिए दो दिन पहले ही मिठाई बनवाना शुरू कर दिया था। यहां गोहाना हलके से विधायक जगबीर सिंह मलिक व भाजपा से जिला अध्यक्ष तीर्थ राणा भी स्वागत करने पहुंचे। ग्रामीणों ने सुधीर के साथ उनके प्रशिक्षक जेपी सिंह को भी सम्मानित किया। गांव लाठ के ग्रामीणों ने 1.50 लाख रुपये व गांव बीधल के ग्रामीणों ने 1.01 लाख रुपये देकर सम्मानित किया।
मां सुमित्रा को पहनाया पदक फिर पिता को किया समर्पित
गांव पहुंचने पर सुधीर ने अपनी सफलता का श्रेय पिता को दिया। उन्होंने अपना पदक पहले मां सुमित्रा देवी को पहनाया। फिर पिता को समर्पित किया। मां ने कहा कि बेटा जो वादा करके गया था, उसे पूरा कर दिखाया। सुमित्रा देवी ने लाडले को चूरमा खिलाकर आशीर्वाद दिया। बेटा देश के लिए पदक जीत सके इसके लिए सुमित्रा खुद भेंस पालती है, ताकि लाडले को पीने के लिए शुद्घ दूध दे सके।
अब पैरालंपिक में पदक जीतने का है सपना
पदक जीत गांव पहुंचे सुधीर ने देशवासियों के प्रेम के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि उनका सपना पेरिस में होने वाले पैरालंपिक में पदक जीतने का है। इसके लिए वह क्वालीफाई कर चुके हैं। फिलहाल वे एशियाई खेलों की तैयारी करेंगे। सुधीर ने 2013 में गांव से ही खेल की शुरुआत की थी। सुधीर ने एशियन गेम्स, एशियन चैंपियनशिप व विश्व चैंपियनशिप में पदक जीते हैं। इसके अलावा दो बार स्ट्रांग मैन ऑफ इंडिया का खिताब जीत चुके हैं।
बहालगढ़ चौक पर सुधीर के साथ सेल्फी लेते प्रशंसक। संवाद- फोटो : Sonipat