इनेलो के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र छिक्कारा और महिला जिलाध्यक्ष संतोष कादियान समेत कई पदाधिकारियों ने मंगलवार को कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य दीपेंद्र हुड्डा ने इन सभी को पार्टी में शामिल कराया। इनके पार्टी छोड़ते ही इनेलो ने एक पत्र जारी किया, जिसमें सुरेंद्र छिक्कारा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण 21 दिसंबर को निष्कासित होने की बात कही गई है। उस पर छिक्कारा ने कहा कि उन्होंने इनेलो को केवल इसलिए छोड़ा है कि उनके परिवार के सभी लोग पहले ही कांग्रेस में शामिल हो गए थे और वह भी परिवार के साथ रहेंगे। निष्कासित के पत्र पर उन्होेंने कहा कि उस पत्र को जारी करने वाले मुझे रोकने के लिए फोन करते रहे, जब मैंने मना कर दिया तो वह पत्र जारी कर दिया।
सुरेंद्र छिक्कारा, महिला जिलाध्यक्ष संतोष कादियान के अलावा हल्का के पूर्व अध्यक्ष सियाराम, एससी सेल जिलाध्यक्ष हरिप्रकाश मंडल, जिला प्रधान बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ सुरेंद्र दहिया, कृष्णा बुमरा, हलका गोहाना युवा प्रधान कुलदीप गहलावत, सुभाष चोपड़ा समेत अन्य ने इनेलो को छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया। सुरेंद्र छिक्कारा के साथी रहे सुरेंद्र पंवार एक साल पहले पार्टी छोड़कर कांग्रेस में चले गए थे और वह शहर से विधायक बने थे। उसके बाद से कयास लगाए जा रहे थे कि सुरेंद्र छिक्कारा भी पार्टी छोड़ सकते हैं, लेकिन उसके बाद भी वह इतने दिन तक इनेलो में रहे। छिक्कारा व अन्य के इनेलो छोड़ने के बाद प्रदेशाध्यक्ष नफे सिंह राठी ने एक पत्र जारी किया, जिसमें उनको पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण छह साल के लिए इनेलो से निष्कासित करने की बात लिखी गई थी। वह पत्र पर भी 21 दिसंबर की तारीख लिखी हुई थी। जिस पर सुरेंद्र छिक्कारा ने कहा कि उनके पास नफे सिंह राठी का मंगलवार सुबह तक फोन आता रहा कि वह पार्टी छोड़कर न जाए। लेकिन मैंने मनाकर दिया था कि मेरे परिवार के लोग वहां है तो मैं उनके साथ ही रहने के लिए जा रहा हूं। इसलिए ही अब पुरानी तारीख में पत्र जारी कर दिया गया।
इनेलो के जिला कार्यालय पर फिर संकट, नेताओं के पार्टी बदलने से छिन रहा
इनेलो के जिला कार्यालय पर सुरेंद्र छिक्कारा के पार्टी छोड़ने से एक बार फिर संकट खड़ा हो गया है। क्योंकि सुरेंद्र छिक्कारा के यहां ही इनेलो का कार्यालय बना हुआ था और अब उनके पार्टी छोड़कर जाने से वह इनेलो का जिला कार्यालय नहीं रहेगा। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि इनेलो का जिला कार्यालय इस तरह से नेताओं के पार्टी छोड़ने से चला गया हो। बल्कि जब इनेलो से टूटकर जजपा बनी थी, तब वरिष्ठ नेता तेलूराम जोगी जजपा में चले गए थे। उस समय इनेलो का कार्यालय उनके यहां था और उनके पार्टी छोड़ने के बाद सुरेंद्र छिक्कारा के यहां कार्यालय बनाया गया था।
सुरेंद्र छिक्कारा के पार्टी छोड़ने के बयान का इनेलो नेताओं ने विरोध जताया
इनेलो के विधि प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष एडवोकेट बालकिशन शर्मा के कार्यालय में मंगलवार को एक बैठक हुई। बालकिशन शर्मा ने कहा कि सुरेंद्र छिक्कारा के उस बयान का विरोध किया गया है, जिसमें उन्होंने पार्टी छोड़कर जाने की बात कही है। जबकि उनको पहले ही निष्कासित कर दिया गया था। उन्होेंने कहा कि वह पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे, जिससे उनको चेतावनी दी गई थी। उसके बाद भी नहीं मानने पर निष्काषित कर दिया गया। इस दौरान प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य कृष्ण मलिक, खरखोदा हल्का के अध्यक्ष अशोक राणा, चंद्रप्रभा, जिले सिंह दहिया, बलवान सिंह दहिया, डॉक्टर अनिल मलिक, अशोक मलिक, संदीप मलिक, चांद सिंह, विनोद चौहान, बलजीत दहिया, जयदीप दहिया, राहुल मलिक, पुरुषोत्तम शर्मा, प्रवक्ता फूलकंवार चौहान, महेंद्र सैनी आदि मौजूद रहे।