रोहतक। गणपति बप्पा मोरया और मंगल मूर्ति मोरया के जयघोष के साथ शनिवार को अनंत चतुर्थी पर जिले के विभिन्न पंडालों से भगवान गणेश की विसर्जन शोभा यात्रा निकाली गई। इससे पहले कई संस्थाओं ने पंडालों में गणपति बप्पा की पूजा अर्चना की।
इसके बाद ढोल-नगाड़ों पर नाचते-गाते श्रद्धालु गोकर्ण धाम पहुंचे जहां गणपति बप्पा मोरिया अगले बरस तू जल्दी आना के जयघोष के साथ एक हजार श्रद्धालुओं ने करीब पांच हजार भगवान गणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन किया। शहर के पंडालों व घरों में श्रद्धालुओं ने टब में गणेश प्रतिमा का विसर्जन कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
गणेश जी की 11 प्रतिमा का टब में किया विसर्जन
स्वामी बालक पुरी मेमोरियल पार्क में भगवान गणेश की 11 प्रतिमाओं का टब में विसर्जन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि जूना अखाड़े के सचिव महंत कमल पुरी महाराज रहे। महामंडलेश्वर बाबा कर्णपुरी ने बताया कि श्रद्धालुओं ने घरों व पंडालों में दस दिन तक भगवान गणेश की प्रतिमाएं विराजमान की थीं। इसके 11 दिन टब में विसर्जन किया गया। इसके साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया है।
पंडाल में ही किया बप्पा का विसर्जन
वैदिक सेवा ट्रस्ट की ओर से पंडाल में ही टब लगाकर बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन किया गया। विसर्जन से पहले हवन व भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें श्रद्धालुओं ने शामिल होकर बप्पा का आशीर्वाद लिया। इस मौके पर अदिश जैन, राकेश वर्मा, मनीष जैन, प्रमोद अग्रवाल, पंकज सिंगला, सुनील अग्रवाल, संजय मलिक, संजय गुप्ता आदि मौजूद रहे।
श्री राम सेवा मंडल की ओर नहर में किया विसर्जन
श्रीराम सेवा मंडल की ओर से शनिवार को किलोई के पास जाकर नहर में बप्पा विसर्जन किया गया। इससे पहले पूजा-अर्चना के बाद बप्पा की शोभायात्रा निकली गई। इसमें ढोल-नगाड़ों पर श्रद्धालु नाचते-गाते नजर आए।
हरिद्वार जाकर किया बप्पा का विसर्जन
डीएलएफ रेजिडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से संपूर्ण डीएलएफ कॉलोनी में विशाल विसर्जन यात्रा निकली गई। इसके बाद गणपति प्रतिमा को विसर्जन के लिए हरिद्वार ले जाया गया। जहां पर पूरे विधि विधान के साथ बप्पा का विसर्जन किया गया। इस मौके पर मुदगिल, मोंटू बुद्धिराजा, आदेश बुद्धिराजा, भारत गिरधर, जय सहगल, अजय उप्पल आदि मौजूद रहे।
प्रतिबंध के बाद भी नहर में किया विसर्जन
प्रतिबंध के बावजूद भी नहरों में धड़ल्ले से गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ। पुलिस की रोक-टोक के बावजूद श्रद्धालुओं ने छिपकर नहर में विसर्जन किया।