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Sonipat News: भगवान श्रीराम-लक्ष्मण विश्वामित्र के साथ पहुंचे जनकपुरी, मार्ग में अहिल्या का किया उद्धार

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सोनीपत। कामी रोड स्थित रामलीला मैदान में श्री रामलीला सभा की ओर से शनिवार को विश्वामित्र आगमन, ताड़का वध, अहिल्या उद्धार व जनकपुरी प्रवेश की लीला का मंचन किया गया। वृंदावन के कलाकारों ने आचार्य सौरभ द्विवेदी के मार्गदर्शन में मंचन को बखूबी निभाया।
इससे पूर्व रामलीला मंचन की शुरुआत मुख्यातिथि के रूप में सभा के पूर्व प्रधान अधिवक्ता राजीव खत्री, मानव अधिकार संरक्षण संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयबीर गहलावत व दिल्ली के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी संजय शर्मा ने दीप प्रज्वलन व भगवान श्रीगणेश जी के पूजन के साथ की। कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिवक्ता मेहताब सिंह खत्री ने की। मंचन के दौरान कलाकारों ने दिखाया कि भगवान श्रीराम व लक्ष्मण विश्वामित्र के आश्रम में रहकर ऋषियों के यज्ञ की रक्षा करने लगे। तभी राक्षसों ने वहां आकर खूब उत्पात मचाया। राम-लक्ष्मण ने राक्षसों का संहार किया। राजा जनक के बुलावे पर विश्वामित्र जनकपुरी पहुंचने के लिए तैयार हुए। वहां राजा जनक ने सीता स्वयंवर का आयोजन किया था। भगवान श्रीराम व लक्ष्मण भी विश्वामित्र के साथ जनकपुरी पहुंचे। इससे पहले मार्ग में उन्हें एक शिला दिखाई दी। विश्वामित्र ने राम को बताया कि किस प्रकार गौतम की पत्नी शिला बन गई थी। राम के चरण के स्पर्श से शिला ने पुन: नारी का रूप धारण किया। जिससे अहिल्या उद्धार हुआ। कार्यक्रम में प्रधान महेंद्र मंगला, महासचिव राजकुमार गोयल, कोषाध्यक्ष अमित कुच्छल व गजेंद्र मंगला सहित सभी सदस्य मौजूद रहे।
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सेक्टर-12 में भगवान श्रीराम ने किया वनवास को प्रस्थान
सोनीपत। सेक्टर-12 में श्री रामायण ट्रस्ट की ओर से चल रहे रामलीला मंचन के चौथे दिन राजा दशरथ-कैकेयी संवाद, भगवान श्रीराम वन गमन व दशरथ देह त्याग की लीला का मंचन किया गया। भगवान श्रीराम के साथ माता सीता व लक्ष्मण के वनवास जाने की लीला ने दर्शकों काे भाव विभोर कर दिया। मंचन में दिखाया गया कि श्रीराम, माता सीता व लक्ष्मण के साथ 14 वर्षों के लिए वन को जाते हैं तो प्रजा उनके वनवास जाने की बात सुनकर भाव विभोर हाे उठती है। महाराज दशरथ उनके वियोग में प्राण त्याग देते हैं। कार्यक्रम में श्री रामायण ट्रस्ट के संचालक विक्की कौशिक, रामलाल कौशिक, अमित कौशिक, मोहन कौशिक, प्रमोद कौशिक मौजूद रहे। संवाद
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