सोनीपत। राष्ट्रसंत जैनाचार्य डॉ. आचार्य दिव्यानंद सूरीश्वर महाराज (निराले बाबा) ने कहा कि तीर्थंकर प्रभु महावीर की ओर से अकेले ही दीक्षा ग्रहण कर अपने जीवन में वीतराग धर्म को आत्मसात किया गया, वही परंपरा आज भी चल रही है। एक महापुरुष के आचरण से जीवन परिवर्तित हो जाता है। उनके प्रभाव से आचरण की परंपरा आरंभ होती है।
निराले बाबा, दिव्यानंद निराले बाबा चातुर्मास समिति की ओर से सेक्टर-15 में चातुर्मास पर आयोजित धर्म सभा में प्रवचन कर रहे थे। उन्हाेंने कहा कि मनुष्य को जीवन में धर्म को आत्मसात करना चाहिए। संसार में जन्म-मरण व रोग का भयंकर दुख है। मनुष्य को इससे बाहर निकलने का पुरुषार्थ करना चाहिए, जो केवल आत्म साधना, योग, स्वाध्याय, तप व संघ सेवा के मार्ग पर मिल सकता है। बेंगलुरु से आई इंदिरा देवी का सम्मान चातुर्मास महिला मंडल से रेखा गर्ग ने किया। कार्यक्रम में अनीता सिंगला, मीना जैन, अन्नु सिंगला, इंदु गुप्ता, सरला जैन, कुंती गोयल व वीना देवी मौजूद रही।