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कम मुआवजा मिलने से नाराज किसानों ने की पंचायत

Mon, 14 Dec 2015 12:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
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गोहाना-सोनीपत रोड पर प्रस्तावित आईएमटी के लिए पांच गांवों की अधिग्रहण की गई तकरीबन 6600 एकड़ भूमि के पहले फेज में कम मुआवजा देने से नाराज किसानों ने जौली गाव में एक पंचायत की और सरकार पर किसानों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया।  
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रविवार को गांव लाठ, जौली, कटवाल, बीधल और भैंसवाल गांवों की पंचायत हुई। पंचायत के दौरान किसानों का कहना था कि प्रस्तावित आईएमटी के लिए पांच गाव की तकरीबन 6600 एकड़ भूमि अधिग्रहीत की गई थी। पहले फेज के तहत चार गांव की तीन हजार एकड़ से ज्यादा भूमि पर सरकार ने 8 दिसंबर को सेक्शन नौ लगाने की घोषणा की थी। सरकार को इस जमीन का मुआवजा देना था, लेकिन सरकार जो मुआवजा दे रही है वह बहुत ही कम है। साथ ही किसानों से एक शपथ पत्र भी लिया जा रहा है। किसानों का कहना है भूमि अधिग्रहण को लेकर एक्ट-2013 में जो कलेक्टर रेट पास किया गया था, उसी के तहत मुआवजा दिया जाए। जबकि सरकार वर्ष 2010 के तहत उन्हें उनकी जमीन का मुआवजा दे रही है। किसानों का कहना है कि सरकार 2010 के तहत उन्हें उनकी जमीन का दोगुना मुआवजा दे रही है जो 40 लाख प्रति एकड़ बांटा है, लेकिन एक्ट-2013 में जो कलेक्टर रेट पास किया गया था उसके तहत किसानों को चार गुना मुआवजा बांटा है। कम मुआवजा देकर सरकार किसानों के साथ अन्याय कर रही है। इसके अलावा सरकार एक शपथ पत्र पर भी किसानों से हस्ताक्षर करा रही है, जो नाजायज है। इतना ही नहीं सरकार किसानों जो मुआवजा राशि दे रही है, वह भी किस्तों में दे रही है। जिसका किसान विरोध कर रहे है। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो किसान आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

क्या है मामला
गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने गोहाना के लाठ, जौली, कटवाल, बीधल और भैंसवाल की तकरीबन 6600 एकड़ भूमि आईएमटी इंडस्ट्रियल मॉडल टाउन के लिए अधिग्रहण करने की घोषणा की। जिसके बाद यूपीए सरकार में रेल बजट के दौरान पूर्व रेलमंत्री पवन बंसल ने उक्त भूमि पर रेल कोच फैक्टरी लगाने की घोषणा की। हालांकि बाद में केंद्र में आई भाजपा सरकार ने रेल कोच फैक्टरी की बात रिकॉर्ड में नहीं होने की बात कही। वहीं सरकार ने भूमि अधिग्रहण के लिए दिसंबर 2013 में सेक्शन छह लगाने की घोषणा की। सरकार ने किसानों द्वारा न्यायालय में किए जाने वाले मुकदमों पर शिकंजा कसने के लिए शपथ पत्र की शर्त लगाते हुए 8 दिसंबर को सेक्शन नौ लगाने की घोषणा की। किसान भूमि अधिग्रहण को लेकर तो उत्साहित हैं लेकिन शपथ पत्र की शर्त पर संशय बना है।
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