कोरोना संक्रमण से लोगों को बचाने में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों ने खुद को बचाने का प्रयास किया, लेकिन ज्यादातर स्वास्थ्यकर्मी इसकी चपेट में आ ही गए। उन्होंने घरों पर रहकर ही कोरोना संक्रमण को मात दी और फिर से लोगों व कोरोना के बीच एक दीवार बनकर खड़े हो गए।
खरखौदा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात लैब तकनीशियन देवेंद्र अब तक कोरोना जांच के लिए पांच हजार से ज्याद सैंपल ले चुके हैं। सैंपल लेने के लिए वह खुद भी कोरोना संक्रमित हो गए और उनके साथ बुजुर्ग माता-पिता व बेटी भी संक्रमित हो गए। इसके बाद होम आइसोलेशन के दौरान उन्होंने तनाव को हावी नहीं होने दिया और परिवार के साथ कोरोना को मात देकर वह खुद दोबारा ड्यूटी पर पहुंच गए।
खरखौदा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात लैब तकनीशियन देवेंद्र अब तक पांच हजार से लोगों की कोरोना जांच के लिए सैंपल ले चुके हैं। गांव नूरनखेड़ा निवासी लैब तकनीशियन देवेंद्र परिवार के साथ सीएचसी के क्वार्टर में ही रह रहा है। देवेंद्र का कहना है कि उनके पिता रामफल की 22 अप्रैल को अचानक तबीयत खराब हो गई। इसके बाद पिता रामफल की कोरोना जांच कराई तो सैंपल रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। इसके बाद उसने पत्नी, बेटे, मां व बेटी की कोरोना जांच कराई। इस दौरान वह खुद भी कोरोना संक्रमित मिले और जगवंती व बेटी सेजल भी संक्रमित हो गए। इसके बाद उसने माता-पिता व बेटी के साथ खुद को होम आइसोलेट कर लिया और पत्नी व बेटे की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उन्होंने उनके भोजन का प्रबंध किया।
लैब तकनीशियन देवेंद्र का कहना है कि कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट पॉजिटिव मिलने के बाद परिवार के सभी सदस्य चिंतित हो गए थे, क्योंकि बुजुर्ग माता-पिता के स्वास्थ्य के चलते उन्हें सबसे ज्यादा खतरा था, लेकिन उसने लगातार होम आइसोलेशन में रहते हुए चिकित्सकों की राय लेते हुए बुजुर्ग माता-पिता का स्वास्थ्य खराब नहीं होने दिया। साथ ही उन्होंने क्वार्टर पर रहते हुए तनाव को हावी नहीं होने दिया। दो मई को परिवार के सभी सदस्यों की कोरोना जांच के दौरान रिपोर्ट निगेटिव आई और कोरोना को मात देकर वह खुद तीन मई को दोबारा ड्यूटी पर लौट आए। अब शेड्यूल के मुताबिक उसने खुद लोगों की कोरोना जांच के लिए दोबारा सैंपल लेने शुरू कर दिए हैं।