कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों ने लगातार हो रही घटनाओं को लेकर सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि आंदोलन तोड़ने की जितनी साजिश रची जाएगी, उतना ही बड़ा कारवां होता जाएगा। किसान नेताओं ने गाजीपुर व सिंघु बॉर्डर की घटनाओं को आरएसएस व भाजपा की साजिश बताया। इसके साथ ही कहा कि सरकार प्रस्ताव देगी तो बातचीत के लिए जरूर जाएंगे, क्योंकि उनकी तरफ से बातचीत का रास्ता हमेशा खुला है।
देशभर में 30 जनवरी को सद्भावना दिवस मनाया जाएगा और किसान नेता उपवास रखेंगे। कुंडली में धरनास्थल पर डॉ. दर्शनपाल, बलबीर सिंह राजेवाल, अमरजीत सिंह, शिवकुमार कक्का, जगजीत सिंह दल्लेवाल, युद्धबीर सिंह ने कहा कि गाजीपुर बार्डर पर गुरुवार की रात को जिस तरह से आंदोलन को दबाने का प्रयास केंद्र व यूपी सरकार ने किया है, वह किसी भी हालत में सहन नहीं किया जाएगा और सरकार को इस तरह की हरकत से बाज आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राकेश टिकैत जिस मजबूती के साथ डटे रहे, उसका नतीजा अब सरकार ने खुद भी देख लिया है और धरनास्थलों पर कई गुना ज्यादा किसान पहुंच गए हैं। कहा कि सरकार ने भाईचारा तोड़ने का प्रयास भी किया लेकिन हरियाणा के किसान पहले से ज्यादा साथ खड़े हो गए। किसान नेता डॉ. दर्शनापाल ने कहा कि इंटरनेट, पानी और बिजली बंद करना सरकार की बौखलाहट का नतीजा है। सरकार ने इस तरह की हरकत को नहीं छोड़ा तो किसान इसके खिलाफ सड़कों पर उतर सकते हैं। उन्होंने दिल्ली में सिंघु बॉर्डर पर बवाल कराने का आरएसएस व भाजपा पर आरोप लगाया।