खरखौदा। हरियाणा राज्य औद्योगिक संरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) की ओर से अब खरखौदा आईएमटी का विस्तार किया जाएगा। इसके लिए एक बार फिर से प्रक्रिया शुरू हो गई है। निगम की तरफ से करीब 58 सौ एकड़ में प्रस्तावित आईएमटी फेज-2 के विस्तार को लेकर काम शुरू हो गया है।
आने वाले समय में पता चलेगा कि योजना को लैंड पुलिंग के माध्यम से सिरे चढ़ाया जाएगा या पार्टनरशिप में। योजना के तहत सरकार ने प्रस्तावित जमीन का मूल्यांकन करा लिया है। इसे लेकर संबंधित एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट भी एचएसआईआईडीसी के पास जमा कर दी है।
खरखौदा की आईएमटी के 32 सौ एकड़ के पहले फेज पर मारुति, सुजुकी व यूनो मिंडा जैसे बड़े नाम जुड़ जाने के बाद इस आईएमटी का विस्तार बहुत ही खास मायने रखता है। खरखौदा की इस आईएमटी को जब भी विस्तार दिया जाएगा उसमें सोनीपत जिले के गांवों के साथ ही झज्जर जिले के गांवों की भी जमीन शामिल की जाएगी।
निगम को आईएमटी के विस्तार के लिए 5800 एकड़ जमीन की जरूरत है। इसके लिए बहादुरगढ़ के छह और सोनीपत के खरखौदा के पांच गांवों की जमीन चिह्नित की गई है। यहां पर काफी संख्या में फैक्टरियां जमीन लेना चाहती हैं जिसकी वजह से निगम ने आईएमटी के विस्तार की योजना बनाई है।
आईएमटी का विस्तार कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेस वे के पूर्वी साइड में कटरा एक्सप्रेस वे के साथ लगती जमीन पर किया जाएगा। निगम ने दोनों एक्सप्रेस वे से लगती जमीन का चयन किया है। निगम की ओर से आईएमटी के विस्तार के लिए इस तरह जमीन का चयन किया गया है ताकि यहां से गुजर रहे केएमपी को क्रॉस न करना पड़े।
यानि केएमपी के एक तरफ से ही जमीन का चयन किया गया है। साथ में जमीन कटरा एक्सप्रेस वे के साथ भी लगती है ताकि भविष्य में यहां के औद्योगिक क्षेत्र को कटरा एक्सप्रेस वे का भी लाभ मिल सके।
आरएंडआर के आवेदनों पर रार
एचएसआईआईडीसी की योजना (रीसेटलमेंट एंड रिहैबिलिटेशन) आरएंडआर पॉकेट को लेकर लंबे समय से संबंधित किसान परेशान हैं। किसान मांग कर रहे हैं जमीन अधिग्रहण हुए 12 वर्ष से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन अब तक उन्हें यह पता नहीं है कि उनके प्लॉट का नंबर कहां पर है। वह विभाग के बहुत से चक्कर काट चुके हैं लेकिन अब तक प्लॉट नहीं मिल पाए हैं।
रीसेटलमेंट एंड रिहैबिलिटेशन के दो हजार से ज्यादा आवेदन आए हैं जिनकी जांच की जा रही है। इनमें सेक्शन-4 लगने के समय जमीन का मालिक कौन था, कितनी जमीन का अधिग्रहण हुआ है और कितने किसान इस योजना के पात्र हैं, की रिपोर्ट बनाने के बाद डीआरओ कार्यालय में दी जाएगी ताकि किसानों को योजना का लाभ देने के लिए मंजूरी ली जा सके। -नरेश रोहिल्ला, एस्टेट प्रबंधक, एचएसआईआईडीसी।