सोनीपत। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के यमुना नदी के पानी में हरियाणा में जहर मिलाने के बयान को लेकर दायर याचिका पर बुधवार को जिला न्यायालय में हुई सुनवाई हुई। केजरीवाल की ओर से पुरानी मांग दोहराई गई। उनकी ओर से केस को स्पेशल न्यायालय में भेजने की फिर से मांग की गई।
सरकारी अधिवक्ता की ओर से तर्क दिया गया है कि केजरीवाल वर्तमान में न सांसद है और न ही विधायक हैं। ऐसे में स्पेशल न्यायालय की मांग करना उचित नहीं है। साथ ही हरियाणा में ऐसी कोई स्पेशल कोर्ट भी नहीं है। अब तक केस की चार बार सुनवाई हो चुकी है लेकिन केजरीवाल एक बार भी पेश नहीं हुए हैं।
सीजीएम नेहा गोयल की अदालत में चल रहे मामले की सुनवाई की चौथी तारीख पर भी अरविंद केजरीवाल न्यायालय नहीं पहुंचे। उनकी टीम ऑफ एडवोकेट ने उनकी तरफ से ऑब्जेक्शन एप्लीकेशन लगाई है जिसका जवाब सरकारी अधिवक्ता की ओर से दिया जाना है। सरकारी अधिवक्ता प्रदीप कौशिक ने लिखित जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है। केस में अब अगली सुनवाई 20 मई को होगी।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से राई जल सेवा प्रभाग के कार्यकारी अभियंता आशीष कौशिक ने सोनीपत की अदालत में इसको लेकर केस दायर किया है। उन्होंने बताया था कि 28 जनवरी को यमुना नदी से सटे आसपास के गांवों के लोग सिंचाई विभाग के परिसर में एकत्र हुए और यमुना में जहर डालने पर रोष प्रकट कर रहे थे। जब उनसे पूछा गया कि इसकी जानकारी कहां से मिली तो उन्होंने सोशल मीडिया में प्रसारित अरविंद केजरीवाल की वीडियो दिखाई।