फोटो 31- सोनीपत के राई स्थित निफ्टम में पहुंचे विदेशी प्रतिनिधिमंडल को विभिन्न जानकारी देती विश
सोनीपत। राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान (निफ्टम) ने खाद्य फोर्टिफिकेशन पर अंतरराष्ट्रीय दक्षिण शिक्षण कार्यक्रम की मेजबानी की। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (एमओएफपीआई) के तत्वावधान में निफ्टम में आयोजित कार्यक्रम में पश्चिम अफ्रीकी राज्यों के आर्थिक समुदाय (ईकोवास) क्षेत्र के 17 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें राष्ट्रीय फोर्टिफिकेशन एलायंसेज के तकनीकी विशेषज्ञ व नीति निर्माता शामिल रहे। कार्यक्रम में फोर्टिफिकेशन पहल के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर विचार-विमर्श किया गया।
निफ्टम के निदेशक डॉ. हरविंदर सिंह ने बताया कि पश्चिम अफ्रीकी स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएएचओ) के अधिकारियों सहित एक उच्च-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी करना अलग ही अनुभव रहा। उन्होंने बताया कि यह दौरा ज्ञान-साझाकरण पहल के क्षेत्रीय महत्व को रेखांकित करता है। विदेश प्रतिनिधिमंडल भारत की सफल खाद्य फोर्टिफिकेशन पहलुओं का अध्ययन करने के लिए निफ्टम आया था। यह यात्रा जर्मन संघीय आर्थिक सहयोग व विकास मंत्रालय (बीएमजेड) की तरफ से आयोजित की गई थी, जिसमें बुर्किना फासो, सेनेगल, नाइजीरिया, कोटे डी आइवर, घाना, बेनिन व मेडागास्कर के प्रतिनिधि शामिल रहे। डॉ. हरविंदर सिंह ने बताया कि यह आदान-प्रदान खाद्य फोर्टिफिकेशन के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। अफ्रीका से हमारे भागीदारों के साथ खाद्य फोर्टिफिकेशन में भारत की विशेषज्ञता और तकनीकी नवाचारों को साझा करने पर गर्व है, जो वैश्विक पोषण सुरक्षा में योगदान दे रहा है। इस दौरान फोर्टिफिकेशन पहल के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर विचार-विमर्श किया गया। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के उप सचिव अरविंद कुमार ने वैश्विक पोषण को बढ़ाने के लिए ऐसे पहलुओं का समर्थन करने में मंत्रालय की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने इंटरेक्टिव सत्र में भारत व दुनिया भर में फोर्टिफिकेशन मानकों, नियमों व व्यापारिक प्रथाओं पर चर्चा की। सत्र का संचालन निफ्टम के इंडस्ट्री चेयर प्रोफेसर अरुण ओम लाल ने किया। संस्थान के अनुसंधान एवं आउटरीच प्रमुख डॉ. कोमल चौहान ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का स्वागत किया। फोर्टिफिकेशन नीतियों को मजबूत करने, प्रभावी हस्तक्षेपों को बढ़ाने व खाद्य सुरक्षा को आगे बढ़ाने पर सार्थक चर्चा की गई।